इंडिया में EV क्रांति के असली हीरो ई-स्कूटर और बाइक, पीछे छूटी कार

इंडिया में EV क्रांति के असली हीरो ई-स्कूटर और बाइक, पीछे छूटी कार

नई दिल्ली। इंडिया में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की असली क्रांति महंगी इलेक्ट्रिक कारों से नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक और ई-रिक्शा से आ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश में बिके करीब 24.5 लाख EV में से लगभग 90% हिस्सेदारी सिर्फ टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर की रही। इनकी सबसे बड़ी ताकत है कम खर्च और ज्यादा कमाई।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विषय में दुनिया भर में सबसे ज्यादा चर्चा ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों की होती है। लेकिन भारत की EV कहानी बिल्कुल अलग है। यहां लोगों ने पर्यावरण से पहले अपनी जेब को देखा और वहीं से इलेक्ट्रिक क्रांति शुरू हुई। भारत में लाखों डिलिवरी पार्टनर, ऑटो चालक, ई-रिक्शा ड्राइवर और छोटे कारोबारी रोजाना सैकड़ों किलोमीटर चलते हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की बचत सीधे उनकी कमाई बढ़ाती है। यही वजह है कि सबसे पहले और सबसे तेज़ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर को अपनाया गया। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में करीब 24.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 25% ज्यादा हैं। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर लगभग 14 लाख यूनिट है। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की कीमत लगभग 8.3 लाख यूनिट रही। कुल EV बिक्री का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं दो श्रेणियों का रहा।

2026 के पहले पांच महीनों में ही देश में 8 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बिक चुके हैं। यह पिछले साल की तुलना में करीब 49% की बढ़ोतरी है। इतना ही नहीं, यह आंकड़ा पूरे FY25 की बिक्री का लगभग 60% है। अब टू-व्हीलर बाजार में EV की हिस्सेदारी 8% से भी ज्यादा हो चुकी है, जो कुछ साल पहले तक सिर्फ एक सपना मानी जाती थी। हालांकि EV तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन बैटरी की ऊंची कीमत अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन की कुल कीमत में 30% से 40% हिस्सा सिर्फ बैटरी का होता है। यही कारण है कि कई खरीदार शुरुआती लागत से पीछे हट जाते हैं।

अब कंपनियां Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल पर तेजी से काम कर रही हैं। इसमें ग्राहक वाहन खरीदता है, लेकिन बैटरी किराये या सब्सक्रिप्शन पर लेता है। इससे वाहन की शुरुआती कीमत काफी कम हो जाती है और जरूरत पड़ने पर बैटरी आसानी से बदली भी जा सकती है। भारत का BaaS बाजार 2025 के 680 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 3.45 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में देश के करीब 90% कमर्शियल थ्री-व्हीलर इलेक्ट्रिक हो सकते हैं। इससे करीब 1.4 करोड़ वाहनों का विशाल बाजार तैयार होगा और 10 अरब डॉलर से अधिक का बैटरी इकोसिस्टम विकसित होने की संभावना है।