ईंधन संकट में भारत की बल्ले-बल्ले, रिफाइनरियां चला रहीं मुनाफे का इंजन
जुलाई में 14 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात का अनुमान, रिकॉर्ड निर्यात से भारतीय रिफाइनरियों की मौज
नई दिल्ली। रूस पर लगे निर्यात प्रतिबंध और मध्य-पूर्व में जारी युद्ध ने दुनिया में पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन की सप्लाई को झटका दिया है। लेकिन इस वैश्विक संकट के बीच भारत की रिफाइनरियों के लिए बड़ा अवसर पैदा हो गया है। ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने और मुनाफा बेहतर होने से भारतीय रिफाइनरियां रिकॉर्ड स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कर रही हैं। अनुमान है कि जुलाई 2026 में भारत से रोजाना करीब 14 लाख बैरल पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात होगा। यह पिछले साल की तुलना में करीब 20% अधिक और मई 2026 के मुकाबले लगभग 50% ज्यादा है। यह सितंबर के बाद का सबसे ऊंचा निर्यात स्तर माना जा रहा है।
इस तेजी की सबसे बड़ी वजह रूस का ईंधन निर्यात सीमित होना और मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव हैं। यूक्रेन के ड्रोन हमलों के बाद रूस ने अपने ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा के लिए कुछ ईंधन निर्यात पर रोक लगाई। वहीं मध्य-पूर्व में संघर्ष के कारण डीजल और जेट फ्यूल की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। ऐसे में दुनिया के कई देशों ने भारतीय रिफाइनरियों का रुख किया है।
इस मौके का फायदा उठाने में रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां सबसे आगे हैं। रखरखाव (मेंटेनेंस) का काम पूरा होने के बाद उनकी रिफाइनरियां फिर पूरी क्षमता से चलने लगी हैं। दूसरी ओर मानसून के कारण देश में डीजल की मांग फिलहाल अपेक्षाकृत कम है, इसलिए कंपनियां ज्यादा उत्पादन विदेश भेज रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डीजल, पेट्रोल और जेट ईंधन पर अच्छा मुनाफा मिलने से भारतीय रिफाइनरियां अधिकतम क्षमता पर उत्पादन कर रही हैं। रूस से तैयार ईंधन की कम सप्लाई ने वैश्विक बाजार में भारतीय रिफाइनरों की स्थिति और मजबूत कर दी है।
हालांकि यह सुनहरा मौका ज्यादा समय तक बना रहेगा या नहीं, यह मध्य-पूर्व की स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होती है या हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही पर और बाधाएं आती हैं, तो भारत के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 40% हिस्सा फारस की खाड़ी के देशों से आयात करता है।
फिलहाल रूस से सस्ते कच्चे तेल की लगातार आपूर्ति भारत के लिए बड़ी राहत बनी हुई है। इस महीने अब तक भारत रोजाना करीब 26 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात कर चुका है, जो उसकी कुल जरूरत का आधे से अधिक है। देश के पास लगभग 75 से 80 दिनों की कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की रणनीतिक उपलब्धता मौजूद है, जिससे निकट भविष्य में आपूर्ति को लेकर तत्काल चिंता नहीं है।
