बारिश, महंगाई और युद्ध… तीन मोर्चों पर घिरा भारतीय बाइक बाजार
• अल नीनो का खतरा बढ़ा, कपनियों की बढ़ी चिंता
शहरों में बिक्री मजबूत, लेकिन ग्रामीण बाजार की रफ्तार सुस्त
नई दिल्ली। देश के टू-व्हीलर बाजार के लिए इस साल सबसे बड़ी चिंता सिर्फ महंगाई नहीं, बल्कि मौसम भी बन गया है। कमजोर और देरी से पहुंचे मानसून, अल नीनो के खतरे, बढ़ती महंगाई और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने गांवों में बाइक की बिक्री पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। हालांकि शहरों में दोपहिया वाहनों की मांग अभी मजबूत बनी हुई है, लेकिन ग्रामीण बाजार की सुस्ती से ऑटो कंपनियों की चिंता बढ़ गई है।
असल में भारत में बिकने वाली एंट्री-लेवल यानी 100cc और 110cc मोटरसाइकिलों की आधे से ज्यादा बिक्री गांवों से होती है। Hero MotoCorp और TVS Motor जैसी कंपनियों की कुल बिक्री का लगभग दो-तिहाई हिस्सा इसी सेगमेंट से आता है। ऐसे में अगर बारिश कमजोर रही और किसानों की आमदनी प्रभावित हुई तो सबसे बड़ा झटका इन्हीं कंपनियों को लग सकता है।
मौसम विभाग ने जुलाई में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है। दूसरी ओर जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई, जो 17 महीने बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर है। बढ़ती खाद्य महंगाई ने ग्रामीण परिवारों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। ऐसे में नए वाहन खरीदने का फैसला कई लोग टाल रहे हैं।
ऑटो डीलर्स संगठन FADA के अनुसार जून 2026 में देश में रिकॉर्ड 18.28 लाख दोपहिया वाहनों की बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 21.22% अधिक रही। लेकिन मई के मुकाबले जून में बिक्री 4.25% घट गई। इसकी सबसे बड़ी वजह ग्रामीण इलाकों में कमजोर मांग और मानसून की धीमी शुरुआत रही।
Hero MotoCorp ने अपनी सालाना रिपोर्ट में साफ कहा है कि अगर अल नीनो का असर बढ़ता है तो कृषि उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित हो सकती है, जिससे मोटरसाइकिलों की मांग भी कमजोर पड़ेगी। Bajaj Auto ने भी माना है कि कमजोर मानसून का असर पूरे ग्रामीण बाजार और उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ सकता है। वहीं TVS Motor का कहना है कि अगर कोई बड़ा बाहरी संकट नहीं आया तो इस साल बाजार में अच्छी बढ़त देखने को मिल सकती है।
ऑटो कंपनियों के सामने सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि महंगे कच्चे माल की चुनौती भी है। फिर भी कंपनियां पूरी तरह निराश नहीं हैं। उनका मानना है कि पुराने वाहनों को बदलने की बढ़ती जरूरत, प्रीमियम मोटरसाइकिलों की बढ़ती मांग और निर्यात बाजार में सुधार इस साल कुछ राहत दे सकते हैं।
इस वित्त वर्ष में भारतीय टू-व्हीलर उद्योग की दिशा काफी हद तक मानसून पर निर्भर करेगी। अगर बारिश अच्छी हुई तो किसानों की जेब में पैसा आएगा और गांवों के शोरूम फिर से ग्राहकों से गुलजार हो सकते हैं। लेकिन यदि अल नीनो और कमजोर मानसून का असर बढ़ा, तो एंट्री-लेवल बाइक बाजार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
