INDIA बना ऑटो पावरहाउस, MARUTI के हंसलपुर प्लांट ने बनाया रिकॉर्ड
29 लाख कारों की ताकत के साथ मारुति ने EV क्रांति को दी रफ्तार
नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी ने एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जिसने देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर की तस्वीर बदल दी है। कंपनी ने गुजरात के हंसलपुर प्लांट में अपने चौथे प्लांट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। यह फैक्ट्री एक जगह से सालाना 10 लाख कारें बनाने वाली भारत का सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बन गया है।
नए प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 2.50 लाख यूनिट है। इसके शुरू होने से हंसलपुर प्लांट की कुल क्षमता 7.5 लाख से बढ़कर 10 लाख वाहन प्रति वर्ष हो गई है। यह पहली बार है जब सुजुकी के 100 साल से ज्यादा के इतिहास में किसी एक मैन्युफैक्चरिंग सेंटर की क्षमता 10 लाख यूनिट तक पहुंची है। इस नए प्लांट के साथ मारुति सुजुकी की कुल उत्पादन क्षमता भी बढ़कर 29 लाख वाहन प्रति वर्ष हो गई है। हंसलपुर फैसिलिटी में कंपनी ने अब तक करीब 25,288 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसमें नए Plant D पर लगभग 3,900 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
नए प्लांट में शुरुआत कंपनी की पहली फ्लैगशिप इलेक्ट्रिक कार e Vitara के प्रोडक्शन से होगी। यही प्लांट मारुति की इलेक्ट्रिक व्हीकल रणनीति का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।
हंसलपुर प्लांट में फिलहाल Fronx, Baleno, Swift और e Vitara जैसे मॉडल तैयार किए जाते हैं। यह फैक्ट्री मारुति के लिए बड़ा एक्सपोर्ट हब भी बन चुकी है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के कुल विदेशी निर्यात में इस प्लांट की हिस्सेदारी करीब 47% रही। मारुति ने हंसलपुर प्लांट में ग्रीन लॉजिस्टिक्स पर भी बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने मार्च 2024 में प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत भारत की पहली ऑटोमोबाइल इन-प्लांट रेलवे साइडिंग शुरू की थी।
इस रेलवे सिस्टम से मार्च 2023 से अब तक 7.5 लाख से ज्यादा गाड़ियों की ढुलाई की जा चुकी है। फरवरी 2026 में गुजरात की यह रेलवे साइडिंग दुनिया की पहली ऐसी परियोजना बनी, जिसे Verra Verified Carbon Standard (VCS) प्रोग्राम के तहत रजिस्टर किया गया।
मारुति सुजुकी इस प्लांट के आसपास के इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े कई सामाजिक काम भी कर रही है। कंपनी ने गुजरात के सीतापुर में Podar Education Network के साथ मिलकर CBSE इंग्लिश मीडियम स्कूल शुरू किया है, जहां अभी 800 से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं। नए प्लांट के शुरू होने से गुजरात में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत की कार मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को नई ताकत मिलेगी।
