2027 से बदलेगी TOYOTA की चाल, भारत और मिडिल ईस्ट की योशिमुरा संभालेंगे कमान
• TOYOTA की ग्लोबल री-स्ट्रक्चरिंग में भारत की बढ़ेगी अहमियत
TOYOTA का अगला बड़ा मिशन: भारत में विस्तार, नए प्लांट और निर्यात पर जोर
जापान की दिग्गज कार निर्माता कंपनी Toyota अपने वैश्विक कारोबार में बड़ा बदलाव करने जा रही है। कंपनी 1 जनवरी 2027 से नई संगठनात्मक व्यवस्था लागू करेगी। इसके तहत भारत, मिडिल ईस्ट, ईस्ट एशिया और ओशिनिया को संभालने वाले मौजूदा रीजन को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाएगा। भारत और मिडिल ईस्ट के लिए अलग रीजन बनाया जाएगा, जिससे इन बाजारों में कारोबार से जुड़े फैसले लेने की ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी। मसाकाजु योशिमुरा (Masakazu Yoshimura) भारत और मिडिल ईस्ट रीजन के CEO बने रहेंगे। इस बदलाव का मकसद भारत में मैन्युफैक्चरिंग विस्तार, स्थानीय बाजार की जरूरतों के मुताबिक रणनीति और कंपनी की प्रतिस्पर्धी क्षमता को मजबूत करना है। TOYOTA ने इस बड़े फेरबदल के साथ Toyota Robotics और Toyota Philosophy and Education Group जैसी नई कॉर्पोरेट इकाइयां बनाने की भी योजना बनाई है।
भारत दुनिया के तेजी से बढ़ते ऑटोमोबाइल बाजारों में शामिल है। TOYOTA यहां अपनी मौजूदगी और उत्पादन क्षमता को लगातार मजबूत करना चाहती है। नए रीजन के गठन से भारत और मिडिल ईस्ट के बाजारों के लिए अलग रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। कंपनी स्थानीय ग्राहकों की जरूरतों, बाजार की मांग और कारोबार की परिस्थितियों के अनुसार तेजी से फैसले ले सकेगी।
कंपनी की योजनाओं के मुताबिक, महाराष्ट्र में 2029 तक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू करने का लक्ष्य है। इसकी सालाना उत्पादन क्षमता करीब एक लाख वाहन हो सकती है। इससे भारत में TOYOTA की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आसपास के बाजारों में निर्यात को मजबूती देने में मदद मिल सकती है।
TOYOTA का यह बदलाव केवल क्षेत्रीय कारोबार तक सीमित नहीं है। कंपनी Toyota Robotics और Toyota Philosophy and Education Group जैसे नए कॉर्पोरेट समूह भी बनाएगी। इसके अलावा प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए Kanri Group का गठन किया जाएगा। कंपनी का उद्देश्य अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बढ़ाना और कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना है।
नई व्यवस्था के तहत उत्तरी अमेरिका, चीन, एशिया और भारत-मिडिल ईस्ट समेत कई क्षेत्रों में नेतृत्व से जुड़े बदलाव किए जाएंगे। कंपनी का मानना है कि बाजार के करीब रहकर काम करने से ग्राहकों की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।
कुल मिलाकर, TOYOTA का यह पुनर्गठन भारत के लिए अहम है। अलग रीजन बनने से भारतीय बाजार को कंपनी की वैश्विक रणनीति में ज्यादा स्पष्ट पहचान और प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में इसका असर उत्पादन, निवेश और निर्यात की योजनाओं पर भी दिखाई दे सकता है।
