अब मोबाइल टावर की छुट्टी! सैटेलाइट से चलेगा स्मार्टफोन

अब मोबाइल टावर की छुट्टी! सैटेलाइट से चलेगा स्मार्टफोन

• पहाड़ हो या जंगल, हर जगह मिलेगा नेटवर्क! मोबाइल की दुनिया में महाक्रांति!

Jio-Airtel के लिए खुलेंगे नए रास्ते, सैटेलाइट नेटवर्क से मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

Starlink-Amazon Leo की बढ़ेगी ताकत, भारत में सैटेलाइट फोन सेवा का रास्ता साफ!

स्मार्टफोन में आएगा सैटेलाइट का दम, भारत में बदल जाएगी मोबाइल कनेक्टिविटी

• अब दूरदराज के इलाकों में भी नेटवर्क की उम्मीद, टेलीकॉम सेक्टर में मचेगी हलचल

भारत में मोबाइल कनेक्टिविटी की दुनिया जल्द बड़ा बदलाव देख सकती है। दूरसंचार नियामक TRAI ने ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसके लागू होने पर स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकेंगे। जहां मोबाइल टावर का नेटवर्क नहीं पहुंचता, वहां भी फोन पर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना बनेगी। TRAI ने 5 नवंबर को अपनी सिफारिशें दूरसंचार विभाग (DoT) को सौंप दी हैं। इसमें सैटेलाइट कंपनियों के लिए Satellite Communication Network (SCN) Provider Authorisation की नई व्यवस्था, डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) कनेक्टिविटी के दो मॉडल और स्पेक्ट्रम इस्तेमाल के नियम शामिल हैं। पहले से आवंटित मोबाइल स्पेक्ट्रम के जरिए सैटेलाइट कनेक्टिविटी देने पर अतिरिक्त स्पेक्ट्रम शुल्क नहीं लगाने की सिफारिश की गई है। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार को लेना है।
TRAI के प्रस्ताव का सबसे बड़ा मकसद सैटेलाइट और मोबाइल नेटवर्क को एक साथ जोड़ना है। इसके तहत Starlink, Amazon Leo, Eutelsat OneWeb और Tata की Nelco जैसी कंपनियां अपनी सैटेलाइट नेटवर्क क्षमता टेलीकॉम ऑपरेटरों को उपलब्ध करा सकेंगी। इसके बाद जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियां अपने ग्राहकों को सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी दे सकेंगी।
TRAI ने SCN Provider Authorisation नाम से नई श्रेणी बनाने का सुझाव दिया है। इसके तहत सैटेलाइट कंपनियां नेटवर्क क्षमता को सेवा के रूप में उपलब्ध करा सकेंगी। हालांकि, वे सीधे आम ग्राहकों को टेलीकॉम सेवाएं नहीं दे पाएंगी। इसके लिए उन्हें अधिकृत टेलीकॉम कंपनियों या सेवा प्रदाताओं के साथ काम करना होगा।
नियामक ने डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा के लिए दो मॉडल प्रस्तावित किए हैं। पहला MSS आधारित मॉडल है, जिसमें L-बैंड और S-बैंड के सैटेलाइट स्पेक्ट्रम से स्मार्टफोन सीधे जुड़ेंगे। दूसरा IMT स्पेक्ट्रम आधारित मॉडल है, जिसमें टेलीकॉम कंपनियों को पहले से आवंटित 600 MHz से 2100 MHz तक के मोबाइल बैंड का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
IMT स्पेक्ट्रम आधारित सैटेलाइट सेवा के लिए TRAI ने अतिरिक्त स्पेक्ट्रम शुल्क नहीं लगाने की सिफारिश की है। हालांकि, कंपनियों को संबंधित टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ समझौता करना होगा। ये सेवाएं इस शर्त पर दी जा सकेंगी कि मौजूदा नेटवर्क में हस्तक्षेप न हो।
SCN प्रदाताओं के लिए AGR का 8 प्रतिशत प्राधिकरण शुल्क प्रस्तावित है। प्रवेश शुल्क 37.5 लाख रुपये और शुरुआती बैंक गारंटी 45 लाख रुपये रखने की सिफारिश है। TRAI की ये सिफारिशें भारत में सैटेलाइट और मोबाइल नेटवर्क के बीच नई साझेदारी का रास्ता खोल सकती हैं। यदि सरकार इन्हें मंजूरी देती है, तो दूरदराज के इलाकों, पहाड़ों और ऐसे क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है।