EV क्रांति के रास्ते में विलेन बने पब्लिक चार्जिग पाइंट्स

EV क्रांति के रास्ते में विलेन बने पब्लिक चार्जिग पाइंट्स

• 13.2 लाख चार्जर की जरूरत, अभी सिर्फ 67,657

• करीब 70 हजार चार्जिंग पाइंट्स से नहीं बदलेगी इलेक्ट्रिक इंडिया की तस्वीर

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। ग्राहक पेट्रोल-डीजल की बढ़ती लागत से बचने और कम रनिंग कॉस्ट के लिए EV की ओर आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार बढ़ने के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी चुनौती सामने आ रही है। मौजूदा समय में देश में पब्लिक चार्जिंग पॉइंट्स की संख्या करीब 67 हजार है, जबकि 2030 तक जरूरत करीब 13.2 लाख चार्जिंग पॉइंट की बताई गई है।
Rubix Data Sciences की सितंबर 2026 की स्टडी के मुताबिक, अगस्त 2026 तक भारत में 67,657 सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट थे। इनमें 1,139 बैटरी-स्वैपिंग स्टेशन इंटरफेस भी शामिल हैं। यह संख्या 2022 की शुरुआत में मौजूद करीब 5,000 सार्वजनिक चार्जरों से काफी ज्यादा है। इसके बावजूद 2030 की अनुमानित जरूरत की तुलना में मौजूदा नेटवर्क केवल करीब 5 फीसदी है। भारत को अगले कुछ वर्षों में 12.5 लाख से ज्यादा नए चार्जिंग पॉइंट जोड़ने होंगे।
10 राज्यों में ही करीब 78 फीसदी सार्वजनिक चार्जर मौजूद हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नेटवर्क मजबूत है, लेकिन छोटे शहरों और कम विकसित क्षेत्रों में EV चालकों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग अभी भी चुनौती बनी हुई है। अगस्त 2026 तक देश में मौजूद 66,518 फिक्स्ड चार्जरों में से करीब 48,709 यानी 73 फीसदी चार्जर 30 kW से कम क्षमता वाले थे। 61-120 kW वाले चार्जरों की संख्या सिर्फ 1,513 और 121-240 kW वाले चार्जरों की संख्या 534 थी। 240 kW से ज्यादा क्षमता वाले चार्जर पूरे देश में केवल नौ थे।
यह व्यवस्था दोपहिया, तिपहिया और शहरों में सीमित दूरी तय करने वाले वाहनों के लिए ठीक हो सकती है। लेकिन लंबी दूरी की इलेक्ट्रिक कारों और भारी कमर्शियल वाहनों के लिए ज्यादा पावर वाले फास्ट चार्जिंग नेटवर्क की जरूरत होगी।
ग्राहक जहां चार्जर खोज रहे हैं, वहीं चार्जिंग स्टेशन चलाने वाले ऑपरेटर पर्याप्त ग्राहक नहीं मिलने से परेशान हैं। रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक चार्जरों का उपयोग स्तर फिलहाल सिर्फ 1 से 5 फीसदी है। ऐसे में छोटे शहरों में चार्जिंग स्टेशन लगाना निजी कंपनियों और फ्यूल पंप डीलरों के लिए महंगा सौदा बन जाता है।
एक 60 kW DC चार्जर लगाने में मशीन पर करीब 8.5-9 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। इसके अलावा ट्रांसफॉर्मर और ग्रिड कनेक्शन पर करीब 5.5-6 लाख रुपये तक खर्च आता है। कुल शुरुआती निवेश लगभग 15-16 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। अगर रोजाना सिर्फ 2-4 वाहन ही चार्जिंग के लिए आएं, तो निवेश की भरपाई करना मुश्किल हो जाता है।