सड़क सुरक्षा के बहाने हाइवे पर छिड़ेगी टेलीकॉम जंग, कारें बनेंगी नया हथियार

सड़क सुरक्षा के बहाने हाइवे पर छिड़ेगी टेलीकॉम जंग, कारें बनेंगी नया हथियार

गाड़ी बताएगी खतरा, सिग्नल देगा रास्ता, बदल जाएगी ड्राइविंग

  5G से जुड़ेगी हर कार, हाईवे बनेंगे डिजिटल नेटवर्क.  TRAI का बड़ा ब्लूप्रिंट, सड़कों पर उतरेगा डिजिटल भारत

नई दिल्ली। भारत में टेलीकॉम कंपनियों की अगली बड़ी जंग अब मोबाइल टावरों, स्पेक्ट्रम नीलामी और सस्ते डेटा प्लान से आगे बढ़कर हाइवे पर लड़ी जा सकती है। इसकी वजह है Vehicle-to-Everything (V2X) नामक नई तकनीक, जिस पर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने हाल ही में 263 पन्नों का महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किया है। इस तकनीक को भारत के भविष्य की डिजिटल मोबिलिटी व्यवस्था और स्मार्ट सड़कों की नींव के रूप में देखा जा रहा है।
भारत सरकार फिलहाल Cellular Vehicle-to-Everything (C-V2X) तकनीक को प्राथमिकता दे रही है। यह वही सेलुलर नेटवर्क तकनीक है, जिस पर आज के 4G और 5G नेटवर्क आधारित हैं। यदि यह मॉडल लागू होता है तो भविष्य में वाहन भी मोबाइल फोन की तरह नेटवर्क से जुड़े एंडपॉइंट बन जाएंगे और हाइवे डिजिटल कम्युनिकेशन कॉरिडोर में बदल सकते हैं।
V2X तकनीक से वाहन केवल चलेंगे ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे से और सड़क पर मौजूद सिस्टम से लगातार “बात” भी करेंगे। यदि किसी वाहन के आगे अचानक दुर्घटना हो जाती है, कोई गाड़ी तेज ब्रेक लगाती है, सड़क पर जाम लग जाता है या कोई पैदल यात्री अचानक सामने आ जाता है, तो यह जानकारी कुछ ही सेकंड में आसपास मौजूद अन्य वाहनों तक पहुंच सकती है। इससे दुर्घटनाएं कम करने और ट्रैफिक को अधिक सुरक्षित व स्मार्ट बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार Cellular Vehicle-to-Everything (C-V2X) तकनीक को अपनाने पर विचार कर रही है। यह तकनीक मौजूदा 4G और 5G नेटवर्क पर आधारित है। जिस तरह आज मोबाइल फोन टेलीकॉम नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, उसी तरह भविष्य में कारें, बसें, ट्रक, टैक्सियां और एंबुलेंस भी नेटवर्क से जुड़ी होंगी। सड़क किनारे लगे ट्रैफिक सिग्नल, टोल प्लाजा, कैमरे और कंट्रोल सेंटर भी इस डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगे। यहीं से टेलीकॉम कंपनियों के लिए बड़ा अवसर पैदा होता है। करोड़ों वाहन यदि नेटवर्क से जुड़ते हैं तो उन्हें लगातार इंटरनेट और डेटा सेवाओं की जरूरत होगी। इससे टेलीकॉम कंपनियों की भूमिका केवल मोबाइल सेवाएं देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे भविष्य की स्मार्ट परिवहन व्यवस्था की रीढ़ बन सकती हैं।
भारत का ऑटोमोबाइल क्षेत्र देश की जीडीपी में 7.1 प्रतिशत और मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में लगभग 49 प्रतिशत योगदान देता है। देश में 67 लाख किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क और 1.46 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग मौजूद हैं। वहीं सड़क माल ढुलाई बाजार का आकार 150 अरब डॉलर से अधिक है। ऐसे में V2X तकनीक परिवहन क्षेत्र की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि असली लड़ाई नेटवर्क की नहीं, बल्कि डेटा की है। हर कनेक्टेड वाहन अपनी लोकेशन, गति, ट्रैफिक की स्थिति, ब्रेकिंग पैटर्न और यात्रा से जुड़ी जानकारी लगातार उत्पन्न करेगा। भविष्य में यह डेटा बेहद मूल्यवान संपत्ति बन सकता है। इसलिए टेलीकॉम कंपनियां, वाहन निर्माता और बड़ी टेक कंपनियां सभी इस उभरते डिजिटल इकोसिस्टम में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करना चाहती हैं।