नई दिल्ली। इंडिया में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग को नई दिशा देने की तैयारी है। सरकार को उम्मीद है कि अगले 10 से 14 महीनों में तीन नए इंडियन स्मार्टफोन ब्रांड मार्केट में उभर सकते हैं। इन कंपनियों को सिर्फ फोन असेंबल करने के बजाय अपना डिजाइन, तकनीक और बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करनी होगी। सरकार की नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) का मकसद भारत को स्मार्टफोन के उत्पादन के साथ-साथ डिजाइन और तकनीक का भी बड़ा केंद्र बनाना है।
सरकार के सहयोग के लिए भारतीय स्मार्टफोन कंपनियों को अपने फोन का ओरिजिनल डिजाइन तैयार करना होगा। किसी दूसरे फोन की कॉपी या सिर्फ डिजाइन में मामूली बदलाव को पर्याप्त नहीं माना जाएगा। सरकार का जोर असेंबली से आगे बढ़कर भारत में डिजाइन और तकनीक विकसित करने पर है। सिर्फ अपना डिजाइन होने का दावा काफी नहीं होगा। कंपनियों को यह भी साबित करना होगा कि फोन से जुड़ी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) उनकी अपनी है। सरकार चाहती है कि भारतीय कंपनियां पेटेंट, डिजाइन, रिसर्च और तकनीकी क्षमता में भी मजबूत हों।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, सरकार को उम्मीद है कि अगले 10 से 14 महीनों में तीन कंपनियां भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड के तौर पर उभर सकती हैं। इन कंपनियों से अलग-अलग सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा करने और आगे चलकर बड़े ब्रांड बनने की उम्मीद है। देश में पहले से काम कर रही Lava International और Ai ऐसी घरेलू कंपनियों में शामिल हैं, जो अपने स्मार्टफोन का डिजाइन भारत में तैयार करने की बात कहती हैं। सरकार फोन में भारत में बने कंपोनेंट इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देगी। इसमें डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा मॉड्यूल, एनक्लोजर, बैटरी और यूएसबी केबल-कनेक्टर जैसे कंपोनेंट शामिल हैं। इनके इस्तेमाल पर 0.2% से 0.5% तक अतिरिक्त इंसेंटिव मिल सकता है।
केंद्र सरकार ने जुलाई में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दी थी। इसके लिए ₹62,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी। इसके तहत पात्र बिक्री पर कंपनियों को 2.25% से 5% तक इंसेंटिव दिया जाएगा। घरेलू स्तर पर कंपोनेंट की खरीद बढ़ाने पर अतिरिक्त लाभ का भी प्रावधान है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह भी संकेत दिया है कि Apple इंडिया में iPhone के अलावा दूसरे उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा सकती है। हालांकि अभी यह साफ नहीं किया गया है कि Apple भारत में कौन से अतिरिक्त उत्पाद बनाएगी और इसकी समयसीमा क्या होगी। सरकार अब भारत को सिर्फ स्मार्टफोन असेंबली का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय डिजाइन, आईपी और घरेलू कंपोनेंट वाला बड़ा स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती है।
