नई दिल्ली। इंडिया के टूव्हीलर मार्केट में एक बार फिर तेज रफ्तार लौटती दिख रही है। TVS Motor ने चालू वित्त वर्ष (FY27) में घरेलू दोपहिया उद्योग के डबल डिजिट ग्रोथ का अनुमान जताया है। कंपनी का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती स्वीकार्यता, पुराने वाहनों की रिप्लेसमेंट डिमांड, बेहतर किफायती फाइनेंसिंग और निर्यात बाजार में तेजी के कारण पूरे साल उद्योग मजबूत प्रदर्शन करेगा।
TVS Motor के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ के.एन. राधाकृष्णन ने कहा कि जून तिमाही में जिस तरह की तेजी देखने को मिली है, वही रफ्तार आने वाली तिमाहियों में भी बनी रहने की उम्मीद है। उनके मुताबिक, उद्योग में कम से कम डबल डिजिट ग्रोथ तय है।
कंपनी ने जून 2026 तिमाही में 1,29,940 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बेचे, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 86% अधिक हैं। इसी दौरान iQube ने 10 लाख ग्राहकों का ऐतिहासिक आंकड़ा भी पार कर लिया। TVS का कहना है कि अब इलेक्ट्रिक स्कूटर केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं। पहले जहां EV खरीदने वाले तकनीक पसंद करने वाले ग्राहक थे, अब आम उपभोक्ता भी पेट्रोल स्कूटर छोड़कर इलेक्ट्रिक मॉडल अपना रहे हैं। कंपनी का दावा है कि अब मांग तेजी से सेमी-अर्बन और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रही है।
बढ़ती मांग को देखते हुए TVS बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है। कंपनी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मासिक उत्पादन क्षमता 40,000 से बढ़ाकर 50,000 से अधिक करने जा रही है। वहीं इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर क्षमता 20,000 से बढ़ाकर 30,000 यूनिट प्रति माह होगी। कंपनी करीब ₹3,500 करोड़ का निवेश कर रही है। इसके तहत नई उत्पादन इकाइयों, क्षमता विस्तार और नए उत्पादों का विकास किया जाएगा। वार्षिक दोपहिया उत्पादन क्षमता 68 लाख से बढ़कर 83 लाख यूनिट और थ्री-व्हीलर क्षमता 2.5 लाख से बढ़कर 4.2 लाख यूनिट करने की योजना है।
TVS ने जून तिमाही में अब तक की सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय बिक्री दर्ज की। अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी को उम्मीद है कि विदेशी बाजार आने वाले महीनों में भी मजबूत बने रहेंगे और कुल बिक्री में बड़ा योगदान देंगे। हालांकि, कंपनी ने माना कि स्टील और एल्युमिनियम जैसी धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से लागत पर दबाव बना हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चा माल महंगा हुआ है। TVS इस दबाव को कीमतों में सीमित बढ़ोतरी, लागत नियंत्रण और बड़े पैमाने पर उत्पादन के जरिए संतुलित करने की कोशिश कर रही है।
