INDIA में EV की रफ्तार बढ़ाने के लिए VEDANTA ने 21 हजार करोड़ झोंके

INDIA में EV की रफ्तार बढ़ाने के लिए VEDANTA ने 21 हजार करोड़ झोंके

• बैटरी से मोटर तक : भारत की EV क्रांति को मिलेगी मेटल पावर

• एल्युमिनियम से क्रिटिकल मिनरल्स तक, EV के लिए VEDANTA तैयार

नई दिल्ली, 9 सितंबर। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ बैटरी, मोटर, चार्जिंग सिस्टम और हल्के वाहन पुर्जों में इस्तेमाल होने वाली धातुओं की मांग भी बढ़ रही है। इसी भविष्य को देखते हुए VEDANTA ग्रुप ने वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत के मेटल और ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ₹21,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है। कंपनी ने एल्युमिनियम, जिंक, कॉपर, स्टील, निकेल, फेरोक्रोम और वैल्यू-एडेड अलॉय की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर यह निवेश किया है।

कंपनी के मुताबिक, यह निवेश भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए जरूरी घरेलू मटीरियल सप्लाई चेन को मजबूत करेगा। ईवी में पारंपरिक वाहनों के मुकाबले कई प्रमुख धातुओं की जरूरत ज्यादा होती है। खासकर कॉपर की खपत करीब 3-4 गुना अधिक हो सकती है। VEDANTA ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.70 लाख टन कैथोड का उत्पादन किया है।

क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ा फोकस

ईवी की पूरी सप्लाई चेन में सिर्फ धातुओं का उत्पादन ही नहीं, बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स की घरेलू उपलब्धता भी अहम है। VEDANTA ने कॉपर, निकेल-क्रोमियम-PGE, टंग्स्टन, ग्रेफाइट, वैनेडियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और पोटाश समेत 10 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक हासिल किए हैं। इनमें से पांच ब्लॉक्स में खोज का काम शुरू हो चुका है।

भारत अपनी क्रिटिकल मिनरल जरूरतों का 80 फीसदी से ज्यादा आयात करता है। वहीं कंपनी के मुताबिक 2047 तक इन मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की मांग चार से दस गुना तक बढ़ सकती है। ऐसे में घरेलू संसाधनों और उत्पादन क्षमता को मजबूत करना ईवी और क्लीन-एनर्जी सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण होगा।

VEDANTA के एल्युमिनियम कारोबार ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 24.5 लाख टन एल्युमिनियम का उत्पादन किया। कंपनी ने ऑटो सेक्टर के लिए कॉपर-डोप्ड अलॉय और आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर विकसित VEDANTA फाउंड्री अलॉय भी पेश किया है। इसके अलावा कंपनी लो-कार्बन एल्युमिनियम Restora और Restora Ultra भी पेश करती है।

वहीं हिंदुस्तान जिंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में 851 किलोटन रिफाइंड जिंक और 627 टन बिक्री योग्य चांदी का उत्पादन किया। कंपनी आईआईटी मद्रास और JNCASR के साथ मिलकर जिंक आधारित बैटरी तकनीक पर भी काम कर रही है।
VEDANTA समूह के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि ईवी की रफ्तार बढ़ने के साथ भारत के लिए वाहनों, बैटरियों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होने वाली धातुओं और क्रिटिकल मिनरल्स की भरोसेमंद घरेलू सप्लाई बेहद जरूरी होगी।