ई-स्कूटर और बाइक कंपनियों पर महंगाई की मार, बढ़ सकते हैं दाम

नई दिल्ली: देश की इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इंडस्ट्री इस समय बड़े दबाव से गुजर रही है। कच्चे माल की लगातार बढ़ती कीमतें, सप्लाई चेन में रुकावट और वैश्विक तनाव ने कंपनियों की लागत को तेजी से बढ़ा दिया है। आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक खरीदना ग्राहकों के लिए महंगा पड़ सकता है। देश की बड़ी कंपनियां जैसे Bajaj Auto, Hero MotoCorp, Ather Energy, Revolt Motors, Euler Motors और Ultraviolette Automotive ने साफ संकेत दिए हैं कि लागत बढ़ने के कारण कीमतों में इजाफा करना पड़ सकता है।

EV इंडस्ट्री को सबसे बड़ा झटका लिथियम-आयन सेल, रेयर अर्थ मैग्नेट, मेमोरी चिप्स और बैटरी में इस्तेमाल होने वाली धातुओं की महंगाई से लगा है। कुछ ही समय में लिथियम की कीमत करीब 8 डॉलर प्रति किलोग्राम से बढ़कर 24 डॉलर प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। वहीं लिथियम-आयन बैटरियों की कीमतें 30 से 50 प्रतिशत तक महंगी हो चुकी हैं।

केवल बैटरी ही नहीं, बल्कि एल्युमिनियम, कॉपर, स्टील, निकेल, कोबाल्ट और प्लास्टिक जैसी जरूरी सामग्रियों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। Bajaj Auto ने अनुमान लगाया है कि केवल कमोडिटी महंगाई से उसकी लागत 3.5 से 4 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। Ather Energy के CEO तरुण मेहता ने कहा कि कच्चे माल और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की कीमतें अभी लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। कंपनी इस साल पहले ही करीब 4,000 रुपये तक कीमतें बढ़ा चुकी है और आगे भी बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

इस संकट के पीछे एक बड़ा कारण AI इंडस्ट्री की तेजी से बढ़ती मांग भी है। दरअसल AI सर्वर और डेटा सेंटर बनाने वाली कंपनियां वही मेमोरी चिप्स और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स खरीद रही हैं, जिनका इस्तेमाल EV में होता है। RAM और DRAM चिप्स की कीमतें कई मामलों में 2 से 4 गुना तक बढ़ चुकी हैं।

Ultraviolette Automotive के सह-संस्थापक नीरज राजमोहन ने कहा कि दुनिया भर की कंपनियां अब अपनी प्रोडक्शन लाइन AI सेक्टर की ओर मोड़ रही हैं, जिससे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को पार्ट्स मिलने में दिक्कत बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन और गैस सप्लाई से ग्लोबल संकट बढ़ता है, तो लंबे समय में लोग पेट्रोल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ ज्यादा तेजी से रुख कर सकते हैं।