महंगे पेट्रोल की मार, EV से प्यार : बदल रही इंडियन फ़ैमिली की पसंद

नई दिल्ली: महंगे पेट्रोल ने वो कर दिखाया, जो सालों की सब्सिडी और पर्यावरण जागरूकता नहीं कर पाई। अब शहरी इंडिया में परिवारों की सोच बदल रही है। पहले सपना था कि हर घर में पेट्रोल वाहन हो लेकिन अब ट्रेंड बन रहा है “हर घर में कम से कम एक EV”।

पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) कहानी को नई रफ्तार मिल रही है। ऑटो बाजार में सुस्ती के बावजूद इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में नई जान दिख रही है। मई के पहले पखवाड़े में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन में 13.5% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि कुल दोपहिया बिक्री 5.5% गिर गई। बाजार सिकुड़ रहा है, लेकिन EV अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही है।

दिलचस्प बात यह है कि EV अभी परिवार की मुख्य कार को रिप्लेस नहीं कर रही, बल्कि दूसरी गाड़ी बन रही है। जिन घरों में पहले से पेट्रोल कार है, वे अब रोजमर्रा के कामों के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीद रहे हैं। स्कूल छोड़ना हो, ऑफिस जाना हो या बाजार से सामान लाना। छोटे और रोज के सफर के लिए EV सबसे पसंदीदा विकल्प बनती जा रही है। वजह साफ है — रातभर चार्ज करो, पेट्रोल पंप की टेंशन खत्म करो और बेहद कम खर्च में सफर करो। EV की रनिंग कॉस्ट करीब 30 से 50 पैसे प्रति किलोमीटर बताई जा रही है।
हाल ही में पेट्रोल की कीमतों में हुई 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने भी EV की तरफ लोगों का झुकाव और बढ़ा दिया है।

इंडिया अपनी 87% कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए वैश्विक तनाव का सीधा असर ईंधन कीमतों पर पड़ता है। इसका असर अब सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में भी तेजी आ रही है। मेट्रो शहरों में कारोबारी और निवेशक ₹30–40 लाख तक निवेश वाले EV चार्जिंग फ्रेंचाइजी मॉडल में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। FY25 में भारत में कुल EV रजिस्ट्रेशन 19.7 लाख यूनिट तक पहुंच गए, जो सालाना आधार पर 16.9% ज्यादा हैं। हालांकि यह बढ़ोतरी ज्यादातर इलेक्ट्रिक स्कूटर और फ्लीट सेगमेंट में दिख रही है।