AI की तीसरी आंख रखेगी हर ट्रक पर नजर, हादसों की उलटी गिनती शुरू

AI की तीसरी आंख रखेगी हर ट्रक पर नजर, हादसों की उलटी गिनती शुरू

ट्रक ड्राइवरों की झपकी अब पकड़ेगा AI, हाइवे पर मौत का करेगा मुकाबला

ट्रक इंडस्ट्री का नया सुरक्षा कमांडर AI बताएगा कब थका है ड्राइवर

नई दिल्ली। भारत की लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन सड़क सुरक्षा के लिहाज से यह सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक भी है। सड़क पर कुल वाहनों में भारी ट्रकों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद, सड़क हादसों और मौतों में इनकी हिस्सेदारी काफी अधिक रहती है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम (DMS) ट्रकिंग सेक्टर के लिए नई उम्मीद बनकर उभरे हैं।
ड्राइवर की थकान, झपकी और ध्यान भटकना सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह है। AI आधारित ADAS और DMS ड्राइवर की आंखों, चेहरे और व्यवहार पर लगातार नजर रखते हैं। सिस्टम झपकी, माइक्रो-स्लीप या ध्यान भटकने का पता लगते ही तुरंत वॉयस अलर्ट देता है। एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार के दौरान AI ज्यादा संवेदनशील तरीके से काम करता है। लगातार मिलने वाले फीडबैक से ड्राइवर की ड्राइविंग आदतों में सुधार देखा गया है। फ्लीट कंपनियों को केवल अलर्ट नहीं, बल्कि 30 दिन का रिस्क एनालिसिस भी मिलता है। इससे कोचिंग, रूट प्लानिंग और ड्राइवर शेड्यूल बेहतर बनाए जा सकते हैं। भारतीय सड़कों और ट्रैफिक के लिए तैयार AI मॉडल विदेशी सिस्टम की तुलना में कम फॉल्स अलर्ट देते हैं। हादसे कम होने से बीमा खर्च, वाहन डाउनटाइम और सप्लाई चेन में रुकावट भी घटती है।
भारत में एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार से ट्रकों की औसत गति बढ़ी है। हालांकि, लंबे और एक जैसे हाइवे पर लगातार ड्राइविंग के दौरान ड्राइवर की सतर्कता धीरे-धीरे कम होने लगती है। यही स्थिति कई बार गंभीर हादसों का कारण बनती है। पारंपरिक सुरक्षा उपाय, जैसे दुर्घटना के बाद जांच या समय-समय पर ट्रेनिंग, इन जोखिमों को वास्तविक समय में नहीं रोक सकते।
विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग परिस्थितियों में एक ही सिस्टम अलग तरीके से काम करता है। उदाहरण के लिए, 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहे हाइवे ट्रक के लिए अलर्ट की संवेदनशीलता शहर में चल रहे डिलिवरी वाहन से अलग रखी जाती है। इससे बेवजह अलार्म नहीं बजते और सिस्टम पर ड्राइवर का भरोसा बना रहता है। समय रहते अतिरिक्त आराम, ड्राइवर बदलने, रूट संशोधन या विशेष प्रशिक्षण जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित ADAS और DMS केवल सड़क हादसे कम करने तक सीमित नहीं हैं। इनके इस्तेमाल से वाहन उपयोग क्षमता बढ़ती है, बीमा लागत घटती है, सप्लाई चेन अधिक भरोसेमंद बनती है और ड्राइवरों का मनोबल भी मजबूत होता है।