अंग्रेज चले गए, गाड़ियां-बाइक छोड़ गए!” अब भारतीय हाथों में ब्रिटिश बैंड्स
• “बैज ब्रिटिश, बॉस भारतीय!” रॉयल एनफील्ड से जेएलआर तक बदली कहानी
• कभी हम खरीदते थे, अब हम मालिक हैं!” भारतीय कंपनियों ने ब्रिटिश ऑटो ब्रैंड्स को दी नई जिंदगी
नई दिल्ली। कभी ब्रिटिश ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की पहचान रहे कई मशहूर बाइक और कार ब्रैंड आज ब्रिटिश मालिकों के हाथ में नहीं हैं। रॉयल एनफील्ड, ट्रायम्फ, बीएसए, नॉर्टन और जगुआर-लैंड रोवर जैसे नामों की आधुनिक कहानी में भारत की भूमिका बेहद अहम हो चुकी है। किसी ब्रैंड को भारतीय कंपनी ने खरीदा, किसी को भारतीय साझेदार मिला तो किसी को मुश्किल दौर से निकालकर फिर से खड़ा किया गया। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर यह कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि जिन ब्रिटिश नामों को कभी भारत में ब्रिटिश राज और अंग्रेजी विरासत से जोड़ा जाता था, उनमें से कई आज भारतीय पूंजी, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और मैनेजमेंट के सहारे आगे बढ़ रहे हैं।
रॉयल एनफील्ड इसका सबसे शानदार उदाहरण है। भारत में इसका सफर 1955 में शुरू हुआ, जब मद्रास मोटर्स के साथ मिलकर एनफील्ड इंडिया की स्थापना हुई और बुलेट का उत्पादन लाइसेंस के तहत शुरू हुआ। 1994 में आइशर ने एनफील्ड इंडिया का अधिग्रहण कर लिया और कंपनी का नाम रॉयल एनफील्ड मोटर्स रखा। इसके बाद कंपनी ने अपनी पूरी रणनीति बदलते हुए मिड-साइज मोटरसाइकिलों पर फोकस किया। आज रॉयल एनफील्ड दुनिया में भारतीय बाइक कंपनी की तरह देखा जाता है।
ब्रिटेन की मशहूर मोटरसाइकिल कंपनी ट्रायम्फ की कहानी थोड़ी अलग है। कंपनी ने भारतीय दिग्गज बजाज ऑटो के साथ साझेदारी की। 2023 में बजाज ने भारत में ट्रायम्फ की बिक्री और मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल ली। दोनों कंपनियों की साझेदारी से बनी मोटरसाइकिलों का उत्पादन बजाज के चाकन प्लांट में शुरू हुआ। 2025 में भारत बिक्री के लिहाज से ट्रायम्फ का दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन गया।
महिंद्रा ने ब्रिटिश मोटरसाइकिल ब्रांड BSA को नई जिंदगी देने का रास्ता चुना। महिंद्रा की कंपनी क्लासिक लीजेंड्स ने 2016 में बीएसए कंपनी का अधिग्रहण किया
ब्रिटिश मोटरसाइकिल ब्रांड नॉर्टन 2020 में प्रशासनिक संकट में पहुंच गया था। टीवीएस मोटर ने नॉर्टन की कुछ संपत्तियां 16 मिलियन पाउंड में खरीद लीं। इसके बाद टीवीएस ने 100 मिलियन पाउंड का अतिरिक्त निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई।
ब्रिटिश ऑटो इंडस्ट्री के सबसे बड़े नामों में जगुआर और लैंड रोवर भी शामिल हैं। 2008 में टाटा मोटर्स ने फोर्ड से इन दोनों ब्रांडों को खरीद लिया।
ब्रिटिश लग्जरी कारों की दुनिया में Bentley और Rolls-Royce की कहानी भी दिलचस्प है। बेंटले अब Volkswagen Group का हिस्सा है, जबकि Rolls-Royce Motor Cars की कमान BMW Group के पास है। ब्रैंड के बैज पर ब्रिटेन की पहचान आज भी चमकती है, लेकिन उन बैज के पीछे काम करने वाले कई हाथ अब भारतीय हैं।
