INDIA की ग्रीन एनर्जी में छलांग! 6 घंटे में Iron-Air बैटरी चार्ज, 18 घंटे देगी बिजली

INDIA की ग्रीन एनर्जी में छलांग! 6 घंटे में Iron-Air बैटरी चार्ज, 18 घंटे देगी बिजली

अब रात में भी मिलेगी सोलर बिजली, दिन भर चार्ज रात में सप्लाई

भारत की बैटरी टेक्नोलॉजी को अमेरिकी एजेंसी की बड़ी मंजूरी

iron-Air बैटरी में सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा का रास्ता साफ
 

भारत के डीप-टेक स्टार्टअप Meine Electric ने ऐसी नई बैटरी तकनीक विकसित की है, जो देश में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के इस्तेमाल का तरीका बदल सकती है। कंपनी ने दुनिया की पहली फास्ट-चार्जिंग Iron-Air बैटरी विकसित करने का दावा किया है, जिसे अमेरिका की स्वतंत्र ऊर्जा तकनीकी कंपनी Customized Energy Solutions (CES) ने सफल परीक्षण के बाद मान्यता भी दे दी है। यह उपलब्धि भारत के लिए इसलिए खास है क्योंकि अब सौर और पवन ऊर्जा से बनी बिजली को दिन-रात इस्तेमाल करना पहले से ज्यादा आसान और सस्ता हो सकता है।

इस बैटरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी Fast Charge Long Discharge (FCLD) तकनीक है। यह बैटरी सिर्फ 6 घंटे में पूरी तरह चार्ज हो जाती है और लगातार 18 घंटे तक बिजली सप्लाई कर सकती है। दिन में सोलर प्लांट से बनी अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके रातभर घरों, उद्योगों और बिजली ग्रिड को ऊर्जा दी जा सकती है। अब तक Iron-Air बैटरियां 50 से 100 घंटे तक चार्ज-डिस्चार्ज चक्र के लिए जानी जाती थीं, इसलिए उनका रोजाना उपयोग मुश्किल था। Meine Electric ने इस सबसे बड़ी चुनौती को दूर करते हुए इसे रोजाना इस्तेमाल के लिए तैयार किया है। अमेरिका की CES लैब ने बैटरी की क्षमता, स्थिरता, चार्ज-डिस्चार्ज प्रदर्शन और भरोसेमंद संचालन का परीक्षण किया। जांच में यह तकनीक सफल रही, जिससे अब कंपनी बड़े स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट और व्यावसायिक इस्तेमाल की दिशा में आगे बढ़ सकेगी।

कंपनी का कहना है कि यह बैटरी लिथियम-आयन बैटरियों की तुलना में अधिक सुरक्षित, कम लागत वाली और आसानी से उपलब्ध लोहे (Iron) जैसे कच्चे माल से तैयार की जाती है। इससे इसकी उत्पादन लागत भी कम रहती है। कंपनी का लक्ष्य ऊर्जा भंडारण की लागत 5 रुपये प्रति यूनिट (kWh) से भी कम रखना है।

Meine Electric की स्थापना वर्ष 2023 में प्रियांश मोहन और स्तुति कक्कड़ ने की थी। यह एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र की पहली और दुनिया की तीसरी कंपनी है, जो Iron-Air आधारित लॉन्ग-ड्यूरेशन एनर्जी स्टोरेज तकनीक पर काम कर रही है।

भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है। ऐसे में यह तकनीक सौर और पवन ऊर्जा को 24 घंटे उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है तो देश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा, बिजली भंडारण सस्ता होगा और कोयले पर निर्भरता भी कम हो सकती है।