• JIO का ग्लोबल धमाका! 12 साझेदारियों से 150 करोड़ यूजर्स तक पहुंचने की तैयारी
• अमेरिका से अफ्रीका तक JIO की दस्तक, ग्लोबल कारोबार बढ़ाने की तैयारी
• 150 करोड़ यूजर्स तक पहुंच सकती है JIO की तकनीक, अमेरिका-जर्मनी पर खास नजर
• होम ब्रॉडबैंड और 5G से ग्लोबल छलांग लगाएगा JIO, स्थानीय कंपनियों से करेगा साझेदारी
भारत में टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद अब रिलायंस JIO की नजर दुनिया के बड़े बाजारों पर है। कंपनी अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों के साथ पूर्वी एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में भी कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रही है। JIO प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने संकेत दिया है कि करीब 12 रणनीतिक साझेदारियों से कंपनी की टेक्नोलॉजी दुनिया के 150 करोड़ अतिरिक्त यूजर्स तक पहुंच सकती है।
JIO हर देश में खुद टेलीकॉम ऑपरेटर बनने की जगह वहां की स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी करना चाहती है। इसके तहत JIO अपने इन-हाउस विकसित टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी स्टैक को विदेशी ऑपरेटर्स के लिए उपलब्ध करा सकती है। इससे कंपनी को हर बाजार में अपना पूरा नेटवर्क और कारोबारी ढांचा नए सिरे से खड़ा करने की जरूरत कम हो सकती है।
मुंबई में प्रस्तावित JIO आईपीओ से पहले देशभर के ब्रोकर्स के साथ बातचीत के दौरान आकाश अंबानी ने इस ग्लोबल विस्तार की संभावनाओं पर संकेत दिए। उनके मुताबिक, भारत में बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी विकसित करने और उसे सफलतापूर्वक चलाने का अनुभव JIO के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उपयोगी साबित हो सकता है।
JIO के लिए होम ब्रॉडबैंड एक महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर बनकर उभर रहा है। कंपनी का मानना है कि अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित बाजारों में भी फाइबर नेटवर्क के विस्तार की संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे बाजारों में JIO का इंटीग्रेटेड होम ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी स्टैक स्थानीय ऑपरेटर्स के लिए उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा, कंपनी अलग-अलग देशों की जरूरतों के हिसाब से अपनी तकनीक उपलब्ध कराने की संभावनाएं भी तलाश रही है। होम ब्रॉडबैंड के साथ 5G टेक्नोलॉजी भी इस विस्तार का अहम हिस्सा बन सकती है।
JIO की योजना सफल होती है तो कंपनी के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कमाई का नया रास्ता खुल सकता है। स्थानीय ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी के जरिए वह अपनी तकनीक को ज्यादा बड़े यूजर बेस तक पहुंचाने की कोशिश करेगी। इस रणनीति का महत्व सिर्फ JIO तक सीमित नहीं है। JIO की कोशिश भारत में विकसित और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जा चुकी तकनीक को दूसरे देशों तक पहुंचाने की है।
JIO की नजर फिलहाल संभावित साझेदारियों और नए बाजारों पर है। करीब 150 करोड़ अतिरिक्त यूजर्स तक पहुंचने की संभावना इस योजना का बड़ा आकर्षण है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए कंपनी को स्थानीय ऑपरेटर्स के साथ ठोस समझौते करने होंगे और अलग-अलग देशों की जरूरतों के अनुरूप अपनी तकनीक उपलब्ध करानी होगी।
