मेड इन इंडिया इलेक्ट्रिक कारों का यूरोप में बजा डंका, स्पेन बना बिग मार्केट

मेड इन इंडिया इलेक्ट्रिक कारों का यूरोप में बजा डंका, स्पेन बना बिग मार्केट

नई दिल्ली : इंडिया में बनी इलेक्ट्रिक कारों की मांग अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रह गई है। यूरोप में ‘मेड इन इंडिया’ इलेक्ट्रिक कारों की धूम मचने लगी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में भारत ने 10,802 इलेक्ट्रिक मोटर कारें एक्सपोर्ट कीं, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा सिर्फ 1,309 वाहन था। एक्सपोर्ट में करीब 8 गुना उछाल आया है।

सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की इलेक्ट्रिक कारों के लिए यूरोप सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है। स्पेन भारत से इलेक्ट्रिक कार खरीदने वाला सबसे बड़ा देश रहा। यहां भारत ने 146.4 मिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक कारें भेजीं। यह भारत के कुल ईवी कार एक्सपोर्ट का करीब 40 फीसदी है। स्पेन को कुल 4,007 इलेक्ट्रिक कारें भेजी गईं। इसके बाद ब्रिटेन दूसरे नंबर पर रहा। ब्रिटेन को भारत से इलेक्ट्रिक कारों का एक्सपोर्ट बढ़कर 78.7 मिलियन डॉलर पहुंच गया। खास बात यह है कि पिछले साल इसी तिमाही में ब्रिटेन को भारत से लगभग नगण्य एक्सपोर्ट हुआ था। इस बार यहां 2,646 इलेक्ट्रिक कारें पहुंचीं।

इंडिया की इलेक्ट्रिक कारों की पहुंच सिर्फ स्पेन और ब्रिटेन तक सीमित नहीं रही। जर्मनी में 25.1 मिलियन डॉलर, नॉर्वे में 21.1 मिलियन डॉलर और डेनमार्क में 21 मिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक कारें भेजी गईं। इसके अलावा बेल्जियम, नीदरलैंड्स, ग्रीस, इटली, स्वीडन और पोलैंड में भी भारतीय ईवी की मांग दिखाई दी।
यूरोप के अलावा भारत ने एशिया-प्रशांत बाजार में भी पकड़ मजबूत की है। जापान ने 13.4 मिलियन डॉलर की भारतीय इलेक्ट्रिक कारें खरीदीं। इजरायल, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, ताइवान और दक्षिण कोरिया में भी भारतीय ईवी पहुंचीं। वहीं पड़ोसी देश नेपाल को 8.1 मिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक कारें एक्सपोर्ट हुईं।

लैटिन अमेरिका में भी भारत की इलेक्ट्रिक कारों के लिए बाजार खुल रहा है। ब्राजील, कोलंबिया, चिली और कोस्टा रिका जैसे देशों में भी भारतीय ईवी भेजी गईं।
सबसे बड़ा संकेत एक्सपोर्ट कमाई में मिला है। भारत की इलेक्ट्रिक मोटर कारों से होने वाली कमाई 22.2 मिलियन डॉलर से बढ़कर 369 मिलियन डॉलर हो गई। यानी भारत अब सिर्फ इलेक्ट्रिक कारें बना नहीं रहा, बल्कि दुनिया के बड़े ईवी बाजारों में अपनी जगह भी बना रहा है। यह भारतीय ऑटो उद्योग के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है।