2030 तक एशियन-पैसिफिक इकोनॉमी में 1.4 लाख करोड़ डॉलर जोड़ेगा मोबाइल इंडस्ट्री, एआई और 5जी बनेंगे विकास की नई ताकत

2030 तक एशियन-पैसिफिक इकोनॉमी में 1.4 लाख करोड़ डॉलर जोड़ेगा मोबाइल इंडस्ट्री, एआई और 5जी बनेंगे विकास की नई ताकत

नई दिल्ली। एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में मोबाइल तकनीक और सेवाओं का योगदान 2030 तक बढ़कर 1.4 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर पहुंचने का अनुमान है, जो मौजूदा करीब 1 लाख करोड़ डॉलर के मुकाबले 40 प्रतिशत अधिक होगा, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, 5जी, डिजिटल सुरक्षा, मजबूत नेटवर्क और डिजिटल संप्रभुता क्षेत्र की अगली आर्थिक छलांग की दिशा तय करेंगे।

मोबाइल उद्योग बनेगा डिजिटल अर्थव्यवस्था का बड़ा इंजन

जीएसएमए की नई ‘मोबाइल इकोनॉमी एशिया पैसिफिक 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल नेटवर्क अब केवल कॉल और इंटरनेट तक सीमित नहीं रह गए हैं। वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डिजिटल कारोबार की बुनियाद बनते जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में मोबाइल उद्योग विनिर्माण, सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और डिजिटल भुगतान जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

2030 तक 1.5 अरब होंगे 5जी कनेक्शन

रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 2030 तक 5जी कनेक्शन की संख्या 1.5 अरब तक पहुंच सकती है। यह क्षेत्र के कुल मोबाइल कनेक्शनों का करीब 50 प्रतिशत होगा। 5जी के विस्तार से तेज इंटरनेट, स्वचालित कारखाने, स्मार्ट शहर, दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित कारोबारी सेवाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

200 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करेंगी कंपनियां

मोबाइल ऑपरेटरों के वर्ष 2025 से 2030 के बीच नेटवर्क और दूसरी डिजिटल सुविधाओं पर 200 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक पूंजीगत निवेश करने का अनुमान है। इस रकम का इस्तेमाल 5जी नेटवर्क, क्लाउड ढांचे, कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंचों, डेटा केंद्रों और साइबर सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने में किया जा सकता है।

विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को सबसे ज्यादा फायदा

जीएसएमए का अनुमान है कि 5जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स से होने वाले आर्थिक लाभ का आधे से ज्यादा हिस्सा विनिर्माण और सेवा क्षेत्र से आएगा। मोबाइल कंपनियां भी अब केवल कनेक्टिविटी देने वाली कंपनियों की भूमिका से आगे बढ़ रही हैं। वे कारोबारों को क्लाउड सेवा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचा, डेटा सुरक्षा और डिजिटल समाधान उपलब्ध करा रही हैं।

ऑनलाइन ठगी ने डिजिटल भरोसे को दी बड़ी चोट

डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार के साथ ऑनलाइन ठगी भी बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। रिपोर्ट के मुताबिक, आसियान देशों में ऑनलाइन ठगी का शिकार होने की जानकारी देने वाले उपभोक्ताओं का अनुपात 2024 में 31 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर 45 प्रतिशत हो गया। यह आंकड़ा बताता है कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ उपभोक्ताओं के भरोसे को बनाए रखना सरकारों और कंपनियों के लिए आर्थिक जरूरत बन चुका है।

ठगी रोकने के लिए सुरक्षा पर बढ़ा निवेश

मोबाइल ऑपरेटर ऑनलाइन धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और साइबर हमलों से निपटने के लिए सुरक्षा तकनीक, ठगी रोकने वाली प्रणालियों और विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग पर निवेश बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि डिजिटल सेवाओं पर भरोसा कमजोर हुआ तो इसका सीधा असर ऑनलाइन कारोबार, डिजिटल भुगतान और नई तकनीकों को अपनाने की रफ्तार पर पड़ सकता है। एशिया-प्रशांत की सरकारें अब डिजिटल संप्रभुता को भी रणनीतिक प्राथमिकता दे रही हैं। इसका मकसद महत्वपूर्ण डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचे और डिजिटल सेवाओं पर राष्ट्रीय नियंत्रण तथा सुरक्षा को मजबूत करना है। इसी कारण स्थानीय डेटा केंद्रों, सुरक्षित क्लाउड सेवाओं, भरोसेमंद कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंचों और संरक्षित डिजिटल वातावरण में निवेश बढ़ाया जा रहा है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल संप्रभुता के साथ नवाचार, खुले बाजार और सीमा पार सहयोग को बनाए रखना जरूरी होगा।

जलवायु और भू-राजनीतिक संकट से नेटवर्क को बचाना चुनौती

डिजिटल नेटवर्क की मजबूती अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत बन चुकी है। जलवायु आपदाएं, भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति शृंखला में रुकावट और डिजिटल सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता सरकारों और उद्योग को ऐसे नेटवर्क तैयार करने के लिए मजबूर कर रही है, जो संकट के समय भी सुरक्षित और चालू रहें। रिपोर्ट में कहा गया है कि महत्वपूर्ण संचार ढांचे की सुरक्षा के लिए सरकारों और निजी कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाना होगा।

2025 में 1.8 करोड़ नौकरियों को मिला सहारा

मोबाइल पारिस्थितिकी तंत्र ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वर्ष 2025 के दौरान करीब 1.8 करोड़ नौकरियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहारा दिया। नेटवर्क विस्तार, मोबाइल सेवाओं, उपकरण निर्माण, सॉफ्टवेयर, डिजिटल भुगतान और प्रौद्योगिकी आधारित कारोबारों ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए। डिजिटल विस्तार के बावजूद एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 70 करोड़ से अधिक वयस्क अब भी इंटरनेट से दूर हैं, जबकि वे मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क की पहुंच वाले इलाकों में रहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इसका कारण केवल नेटवर्क की कमी नहीं, बल्कि महंगे उपकरण, डिजिटल कौशल की कमी, स्थानीय भाषा में सामग्री का अभाव और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर डर भी है।

जीएसएमए बोला—जिम्मेदारी लगातार बढ़ रही

जीएसएमए के एशिया-प्रशांत प्रमुख जूलियन गोरमैन ने कहा कि मोबाइल नेटवर्क कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल भरोसे और मजबूत डिजिटल ढांचे की नींव बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ठगी, साइबर खतरों और डिजिटल संप्रभुता को लेकर सरकारों तथा नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ रही हैं, जिससे मोबाइल उद्योग की जिम्मेदारी भी लगातार बढ़ती जा रही है।

कुआलालंपुर में होगी भविष्य की डिजिटल रणनीति पर चर्चा

यह रिपोर्ट सितंबर में आयोजित होने वाले एम360 आसियान 2026 सम्मेलन से पहले कुआलालंपुर में जारी की गई है। सम्मेलन में सरकारों, दूरसंचार कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल भरोसा, साइबर सुरक्षा, मजबूत नेटवर्क और डिजिटल संप्रभुता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।