EV से छेड़छाड़ का खेल खत्म: ई-रिक्शा हो या E-BIKE, नहीं चलेगी हैकर्स की मनमानी

EV से छेड़छाड़ का खेल खत्म: ई-रिक्शा हो या E-BIKE, नहीं चलेगी हैकर्स की मनमानी

नई दिल्ली। अगर आप इलेक्ट्रिक बाइक, स्कूटर या ई-रिक्शा चलाते हैं तो जल्द ही इनके लिए भी साइबर सिक्युरिटी नियम लागू हो सकते हैं। सरकार ऐसे नए नियम तैयार कर रही है, जिनका मकसद इलेक्ट्रिक वाहनों को हैकिंग और साइबर हमलों से सुरक्षित बनाना है। हाल के दिनों में कुछ ई-रिक्शा की बैटरियों को ब्लूटूथ ऐप के जरिए बीच रास्ते में बंद कर देने की घटनाओं के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने पहले AIS-189 और AIS-190 नाम से दो नए ऑटोमोटिव मानक प्रस्तावित किए थे। इनका मकसद कनेक्टेड वाहनों की साइबर सुरक्षा और सॉफ्टवेयर अपडेट सिस्टम को सुरक्षित बनाना है। इन नियमों को अक्टूबर 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है। हालांकि शुरुआती प्रस्ताव में ये नियम केवल पैसेंजर कार (M कैटेगरी) और कमर्शियल वाहन (N कैटेगरी) के लिए थे। इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन (L कैटेगरी) इसमें शामिल नहीं थे। अब सरकार और ऑटो इंडस्ट्री चर्चा कर रहे हैं कि इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक और ई-रिक्शा को भी इन नियमों के दायरे में लाया जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाले EV सेगमेंट हैं। ऐसे में इनकी साइबर सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है जितनी कारों की। अगर इनमें सुरक्षा कमजोर रही तो हैकिंग या रिमोट कंट्रोल जैसे खतरे बढ़ सकते हैं। हाल ही में सरकार ने कुछ मोबाइल ऐप्स जैसे BAT-BMS, Epoch-i-ion और Lossigy को हटाने का निर्देश दिया था। आरोप था कि इन ऐप्स का गलत इस्तेमाल कर कुछ लोग ई-रिक्शा की बैटरी को दूर बैठे ही बंद कर देते थे। इससे वाहन बीच रास्ते में रुक जाते थे और चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।

भारी उद्योग मंत्रालय ने भी वाहन निर्माताओं को सलाह दी है कि वे AIS-189 और AIS-190 नियमों को लागू करने की तैयारी शुरू करें। हालांकि कुछ ई-रिक्शा कंपनियों का कहना है कि अतिरिक्त सुरक्षा मानकों से वाहनों की कीमत बढ़ सकती है। उनका मानना है कि ई-रिक्शा खरीदने वाले अधिकांश ग्राहक सीमित आय वाले होते हैं, इसलिए नियम बनाते समय लागत का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। कुछ कंपनियां अब ब्लूटूथ आधारित बैटरी सिस्टम की जगह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित तकनीक अपना रही हैं, जिसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है और जिसे दूर से आसानी से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।