स्लो इंटरनेट कनेक्शन : SIM पोर्टिंग में अब मोबाइल नंबर नहीं, ऑपरेटर बदलेगा

स्लो इंटरनेट कनेक्शन : SIM पोर्टिंग में अब मोबाइल नंबर नहीं, ऑपरेटर बदलेगा

• खराब नेटवर्क से परेशान? एक SMS से पोर्ट करें SIM, नंबर रहेगा वही

• घर बैठे शुरू करें SIM पोर्टिंग की प्रक्रिया, SIM पोर्ट कराने के लिए भेजें यह SMS

मोबाइल पर बार-बार कॉल कटना, इंटरनेट की धीमी स्पीड और कमजोर नेटवर्क से परेशान हैं तो अब ऑपरेटर बदलने के लिए नया मोबाइल नंबर लेने की जरूरत नहीं है। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) की मदद से आप अपना पुराना नंबर बरकरार रखते हुए Jio, Airtel, Vi या BSNL में जा सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ आसान स्टेप्स पूरे करने होंगे। हालांकि, पोर्टिंग से पहले नए ऑपरेटर के नेटवर्क और प्लान की जानकारी लेना जरूरी है।
SIM पोर्ट कराने के लिए सबसे पहले अपने मौजूदा मोबाइल नंबर से मैसेज बॉक्स खोलें। इसमें PORT लिखें, एक स्पेस दें और अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर टाइप करें। फिर इसे 1900 पर भेज दें। उदाहरण के लिए, PORT 9876543210। इसके बाद आपको 1901 से यूनिक पोर्टिंग कोड (UPC) मिलेगा। इस कोड की मदद से आप उस कंपनी के स्टोर या अधिकृत बिक्री केंद्र पर जाकर पोर्टिंग की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं, जिसमें आप जाना चाहते हैं। वहां जरूरी पहचान संबंधी जानकारी और दस्तावेज देने पड़ सकते हैं।
ट्राई के नियमों के अनुसार, एक ही लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र में पोर्टिंग आम तौर पर तीन कार्यदिवस में पूरी होती है। दूसरे सेवा क्षेत्र में पोर्ट कराने पर इसमें पांच कार्यदिवस लग सकते हैं। जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के कुछ क्षेत्रों में प्रक्रिया में 15 कार्यदिवस तक लग सकते हैं। पोर्टिंग के दौरान सेवा कुछ समय के लिए बंद भी रह सकती है।
पोर्टिंग से पहले जान लें कि आपका मौजूदा मोबाइल कनेक्शन कम से कम 90 दिन पुराना होना चाहिए। पोस्टपेड ग्राहक के बिल और बकाया भुगतान पूरे होने चाहिए। SIM बदलने या रिप्लेस कराने पर पोर्टिंग के लिए सात दिन का इंतजार करना पड़ सकता है। पोर्टिंग कोड सीमित समय के लिए वैध होता है। सामान्य क्षेत्रों में इसकी वैधता चार दिन है। यदि पोर्टिंग का अनुरोध वापस लेना चाहते हैं, तो निर्धारित समय के भीतर CANCEL के साथ अपना मोबाइल नंबर लिखकर 1900 पर SMS भेज सकते हैं।
सिर्फ सस्ते रिचार्ज प्लान को देखकर कंपनी न चुनें। पहले अपने घर, दफ्तर और रोजाना आने-जाने वाले रास्तों पर नेटवर्क की स्थिति पता करें। इंटरनेट स्पीड, कॉलिंग क्वालिटी, 4G/5G कवरेज और डेटा लिमिट की तुलना भी करें। पोर्टिंग के बाद आपके पुराने प्रीपेड प्लान का बचा हुआ बैलेंस नए ऑपरेटर में ट्रांसफर नहीं होता।