अब हैक नहीं होंगी स्मार्ट कारें! इंटरनेट से जुड़ी कारों पर रहेगा डिजिटल पहरा

अब हैक नहीं होंगी स्मार्ट कारें! इंटरनेट से जुड़ी कारों पर रहेगा डिजिटल पहरा

भारत में पहली बार कारों के लिए साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क

हाईटेक कारों की सुरक्षा होगी के नियम  2029 तक लागू होंगे

अब स्मार्ट कारों को हैक करना आसान नहीं होगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पहली बार सॉफ्टवेयर-डिफाइंड और एडवांस ऑटोमेटेड वाहनों के लिए अनिवार्य साइबर सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर अपडेट मैनेजमेंट नियम प्रस्तावित किए हैं। इनका उद्देश्य हैकिंग, मैलवेयर हमलों, असुरक्षित OTA (Over-the-Air) अपडेट और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े साइबर खतरों से वाहनों की सुरक्षा करना है। नए नियम चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे और 2029 तक सॉफ्टवेयर अपडेट वाली अधिकांश गाड़ियों को इनके दायरे में लाया जाएगा।

भारत में तेजी से बढ़ रही कनेक्टेड और स्मार्ट कारों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने पहली बार ऐसे नियमों का मसौदा तैयार किया है, जिनके तहत सॉफ्टवेयर से चलने वाली गाड़ियों के लिए साइबर सुरक्षा और सुरक्षित सॉफ्टवेयर अपडेट अनिवार्य किए जाएंगे।

सरकार का मानना है कि आज की आधुनिक कारें केवल इंजन से नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से भी संचालित होती हैं। ऐसे में अगर कोई साइबर हमला होता है या कोई हैकर वाहन के सॉफ्टवेयर तक पहुंच जाता है, तो वाहन की सुरक्षा और यात्रियों की जान दोनों खतरे में पड़ सकती हैं। प्रस्तावित नियम उन यात्री वाहनों, कमर्शियल वाहनों और ट्रैक्टरों पर लागू होंगे, जिनमें कम से कम एक इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) हो और जो लेवल-3 या उससे अधिक ऑटोमेटेड ड्राइविंग क्षमता रखते हों।

सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, अक्टूबर 2026 से लेवल-3 या उससे ऊपर के नए वाहन मॉडलों के लिए इन नियमों का पालन अनिवार्य होगा। इसके बाद अप्रैल 2027 से पहले से बाजार में मौजूद ऐसे मॉडलों पर भी ये नियम लागू कर दिए जाएंगे। इसके बाद जिन गाड़ियों में OTA (Over-the-Air) अपडेट की सुविधा होगी, उन्हें 2028 के दौरान इन नियमों के दायरे में लाया जाएगा। वहीं अक्टूबर 2029 तक सॉफ्टवेयर अपडेट पाने वाली लगभग सभी गाड़ियों के लिए साइबर सुरक्षा नियम लागू करने की योजना है।

OTA अपडेट का मतलब है कि कार का सॉफ्टवेयर मोबाइल फोन की तरह इंटरनेट के जरिए अपडेट हो जाएगा और इसके लिए सर्विस सेंटर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि यही सुविधा साइबर हमलों का रास्ता भी बन सकती है, इसलिए सरकार अब इसे सुरक्षित बनाने पर जोर दे रही है। सरकार बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दे रही है। वाहन निर्माताओं को बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) के लिए सुरक्षित कोडिंग और मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी होगी, ताकि कोई भी हैकर दूर से वाहन या उसकी बैटरी को नियंत्रित न कर सके।