MAKE IN INDIA में एल्यूमिनियम स्क्रैप पर ड्यूटी क्यों? SIAM का टैक्स पर सवाल

MAKE IN INDIA में एल्यूमिनियम स्क्रैप पर ड्यूटी क्यों? SIAM का टैक्स पर सवाल

नई दिल्ली। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने सरकार से एल्युमिनियम स्क्रैप पर लगने वाली 2.5% बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) हटाने की मांग की है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) का कहना है कि यह शुल्क ऐसे समय में लागत बढ़ा रहा है, जब ऑटो कंपनियों के लिए रिसाइकिल्ड एल्युमिनियम की जरूरत लगातार बढ़ रही है और दुनिया भर में स्क्रैप की सप्लाई पर दबाव है। SIAM ने 14 जुलाई 2026 को वित्त मंत्रालय को पत्र भेजकर ड्यूटी हटाने की मांग की है।

ऑटो इंडस्ट्री में एल्युमिनियम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह वाहन का वजन कम करना, ईंधन की बचत बढ़ाना और इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरतों को पूरा करना है। SIAM के मुताबिक, अब चार पहिया वाहनों में इस्तेमाल होने वाले मटीरियल में एल्युमिनियम की हिस्सेदारी करीब 20% और दोपहिया वाहनों में करीब 15% तक पहुंच गई है। देश में इस्तेमाल होने वाले सेकेंडरी यानी रिसाइकिल्ड एल्युमिनियम का करीब 60-65% हिस्सा ऑटो सेक्टर खपत करता है। सेकेंडरी एल्युमिनियम देश की कुल एल्युमिनियम सप्लाई का लगभग 40% है, जो करीब 22 लाख टन सालाना बैठता है। स्क्रैप इसी सेकेंडरी एल्युमिनियम का प्रमुख कच्चा माल है और इसका इस्तेमाल कास्ट कंपोनेंट, इंजन पार्ट्स और स्ट्रक्चरल पार्ट्स बनाने में होता है।

SIAM के मुताबिक, एल्युमिनियम स्क्रैप से तैयार सेकेंडरी एल्युमिनियम प्राथमिक एल्युमिनियम के मुकाबले करीब 10-20% सस्ता पड़ सकता है। भारत में घरेलू स्तर पर एल्युमिनियम स्क्रैप का कलेक्शन अभी काफी बिखरा हुआ है। SIAM के मुताबिक, देश में होने वाला घरेलू स्क्रैप कलेक्शन इंडस्ट्री की जरूरत का सिर्फ करीब 15% पूरा करता है। बाकी जरूरत आयात से पूरी करनी पड़ती है। वेस्ट एशिया में संघर्ष के बाद एल्युमिनियम की वैश्विक कीमतों और सप्लाई पर भी असर पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, संकट के बाद कुछ महीनों में एल्युमिनियम की कीमत करीब 27% बढ़कर 3,370 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई। भारत के लिए वेस्ट एशिया एक महत्वपूर्ण स्क्रैप सप्लाई क्षेत्र रहा है।

UAE ने 10 जून से 8 अक्टूबर 2026 तक स्टील, कॉपर और एल्युमिनियम स्क्रैप के निर्यात पर अस्थायी रोक लगाई है। UAE इंडिया के लिए एल्युमिनियम स्क्रैप का बड़ा सप्लायर रहा है। 2025 में ही वहां से भारत ने करीब 1.76 लाख टन स्क्रैप आयात किया था। यूरोप से मिलने वाले स्क्रैप को लेकर भी भारत के सामने चुनौती है। यूरोपीय संघ के संशोधित Waste Shipments Regulation के तहत गैर-खतरनाक कचरे के गैर-OECD देशों को निर्यात पर नियम कड़े किए गए हैं।