1,923 वेरिएंट और हजारों कॉम्बिनेशन : कार खरीदना आसान, पर बेस्ट मॉडल चुनना सिरदर्द

1,923 वेरिएंट और हजारों कॉम्बिनेशन : कार खरीदना आसान, पर बेस्ट मॉडल चुनना सिरदर्द

• एक ही कार के इतने रूप! फीचर्स और कीमत के खेल में कन्फ्यूज हुए खरीदार
• भारत में कारों की ‘वेरिएंट वार’: 5 साल में 56% बढ़े विकल्प, अब ग्राहक पूछ रहे हैं कौन सी लें

मुंबई। भारत में कार खरीदना पहले के मुकाबले आसान हुआ है, लेकिन सही कार और सही वेरिएंट चुनना अब बड़ी चुनौती बन गया है। कार कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए एक ही मॉडल में अलग-अलग इंजन, गियरबॉक्स, फीचर्स और कीमतों के कई विकल्प दे रही हैं। इससे पसंद तो बढ़ी है, लेकिन फैसला लेना उतना ही मुश्किल हो गया है। 2021 के बाद देश में पैसेंजर व्हीकल मॉडलों की संख्या करीब 8% बढ़ी है, जबकि वेरिएंट की संख्या 56% बढ़कर 1,923 पहुंच गई है। यानी अब ग्राहक के सामने सिर्फ यह सवाल नहीं है कि कौन-सी कार खरीदें, बल्कि बड़ा सवाल यह भी है कि उसी कार का कौन-सा वेरिएंट उसकी जरूरत और बजट के हिसाब से सबसे बेहतर है।
Hyundai Motor India के प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी एंड प्लानिंग प्रमुख अमित धौंडियाल ने कहा कि जब एक ही मॉडल के कई वेरिएंट में अंतर बहुत कम रह जाता है तो कई बार ग्राहक के लिए यह यह समझना मुश्किल हो जाता है कि 50 हजार या एक लाख रुपये ज्यादा खर्च करने पर आखिर उसे अतिरिक्त क्या मिलेगा।
मारुति सुजुकी के मुताबिक, तरह-तरह के ग्राहकों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। कोई पेट्रोल कार चाहता है, कोई सीएनजी, कोई ऑटोमैटिक और कोई ज्यादा फीचर्स वाला मॉडल। मारुति के सीनियर एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पार्थो बनर्जी के अनुसार, कंपनी के पास फिलहाल 1,100 से ज्यादा वेरिएंट-कलर कॉम्बिनेशन हैं। अब ग्राहक सिर्फ अलग-अलग मॉडल की तुलना नहीं करता। वह एक ही मॉडल के कई वेरिएंट के फीचर्स, माइलेज, प्रदर्शन और कीमत की भी तुलना करता है।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के उपाध्यक्ष साई गिरिधर के मुताबिक, ग्राहक अब पहले से ज्यादा रिसर्च करके शोरूम पहुंचते हैं। आमतौर पर ग्राहक पहले ब्रैंड और अपना बजट तय करता है। इसके बाद डीलर उसे उसी कीमत के दायरे में उपलब्ध अलग-अलग वेरिएंट समझाता है।
डीलर पक्ष के मुताबिक, आमतौर पर दो वेरिएंट के बीच कीमत का अंतर करीब 50 हजार से 75 हजार रुपये होता है। यही अंतर ग्राहक के लिए सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या अतिरिक्त फीचर्स के लिए 50-75 हजार रुपये और खर्च करना सही है?
अगर ग्राहक को सनरूफ, बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम, बेहतर सेफ्टी फीचर्स, ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन या ज्यादा ताकत वाला इंजन चाहिए, तो महंगा वेरिएंट उसके लिए बेहतर हो सकता है। लेकिन जिन फीचर्स की जरूरत नहीं है, उनके लिए अतिरिक्त पैसा खर्च करना जरूरी नहीं। अगली बार कार खरीदते समय सिर्फ यह न देखें कि कौन-सी कार अच्छी है। यह भी देखें कि आपकी जरूरत के लिए कौन-सा वेरिएंट सही है।