नई दिल्ली: इंडिया का पैसेंजर व्हीकल (PV) सेक्टर अब एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले पांच वर्षों में ऑटो इंडस्ट्री सिर्फ नई कारें लॉन्च करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी टेक्नोलॉजी और एक्सपोर्ट क्षमता बढ़ाने पर भारी निवेश करेगी। रिपोर्ट के अनुसार FY26 से FY30 के बीच देश की ऑटो कंपनियां ₹3.2 से ₹3.5 लाख करोड़ तक का निवेश करने जा रही हैं, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) से जुड़ी तकनीक और इकोसिस्टम पर खर्च होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वर्षों में भारतीय ऑटो इंडस्ट्री का सबसे बड़ा फोकस इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर रहने वाला है। ऑटो कंपनियां जो कुल निवेश करेंगी, उसका करीब 60-70% हिस्सा EV प्लेटफॉर्म, बैटरी टेक्नोलॉजी और उससे जुड़े इकोसिस्टम पर खर्च होगा। कंपनियां नई इलेक्ट्रिक कारें विकसित करने, बेहतर बैटरी बनाने, ज्यादा रेंज देने वाली तकनीक और चार्जिंग नेटवर्क जैसे ढांचे को मजबूत करने पर बड़ा पैसा लगाएंगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश की टॉप-5 ऑटो कंपनियां अकेले ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा निवेश करने की तैयारी में हैं। इससे बाजार में नए EV मॉडल आने, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने और उत्पादन क्षमता विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है। इसका फायदा यह भी हो सकता है कि भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत कम करने में मदद मिले। कंपनियों के लिए शुरुआती दौर आसान नहीं होगा। FY23-FY25 के दौरान ऑटो सेक्टर का ROCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड) 15-20% के बीच रहा, लेकिन अब बड़े निवेश के कारण शुरुआती वर्षों में मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
इंडियन कार इंडस्ट्री अब सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि एक्सपोर्ट पर भी जोर दे रहा है। FY26 में पैसेंजर व्हीकल एक्सपोर्ट कुल बिक्री वॉल्यूम का 18.7% रहा, जबकि FY23-FY26 के बीच इसमें करीब 12% CAGR दर्ज की गई। इसी वजह से कंपनियां ऐसे फ्लेक्सिबल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट तैयार कर रही हैं, जहां से घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों की मांग पूरी की जा सके। हालांकि इस तेज बदलाव के बीच चुनौतियां भी कम नहीं हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि EV की मांग उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं बढ़ी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त नहीं बना या नए EV खिलाड़ियों को बाजार में टिकने में दिक्कत आई, तो सेक्टर की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
