Continental की भारत के 3.3 करोड़ के टायर मार्केट पर नजर, UP में 100+ करोड़ का निवेश

Continental की भारत के 3.3 करोड़ के टायर मार्केट पर नजर, UP में 100+ करोड़ का निवेश

मोदीनगर (मोदीपुरम) प्लांट में 23 इंच तक के टायर बनेंगे
भारत के टायर बाजार में जर्मन कंपनी की बड़ी छलांग

जर्मनी की दिग्गज टायर कंपनी Continental Tires India भारत के तेजी से बढ़ते प्रीमियम पैसेंजर व्हीकल टायर बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने भारत के रिप्लेसमेंट पैसेंजर कार रेडियल टायर बाजार पर फोकस बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश स्थित अपने मोदीपुरम प्लांट में 10.5 मिलियन यूरो (करीब 100 करोड़ रुपये से ज्यादा) का निवेश शुरू किया है।
इस निवेश के बाद कंपनी भारत में 23 इंच तक के बड़े आकार वाले टायरों का उत्पादन कर सकेगी। फिलहाल प्लांट में 13 से 20 इंच तक के टायर बनाए जाते हैं। Continental Tires India की मैनेजिंग डायरेक्टर नेविन असलान-ओजकान ने बताया कि भारत में नए पैसेंजर वाहनों में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी SUV, क्रॉसओवर और 4×4 मॉडल की हो गई है। कंपनी के अनुसार भारत का रिप्लेसमेंट PCR टायर बाजार वर्तमान में सालाना करीब 3.2 से 3.3 करोड़ टायर का है। कंपनी का अनुमान है कि 17 इंच से बड़े टायरों की मांग अगले पांच साल में डबल डिजिट में बढ़ेगी। वहीं 18 इंच और उससे ऊपर के टायरों में करीब 20 फीसदी तक ग्रोथ की संभावना है।
Continental का कहना है कि वह भारतीय बाजार में सिर्फ कम कीमत वाले टायरों की दौड़ में शामिल नहीं होना चाहती। कंपनी की रणनीति बेहतर तकनीक, सुरक्षा और परफॉर्मेंस वाले टायर उपलब्ध कराने की है। भारतीय ग्राहक अब केवल कीमत नहीं देख रहे हैं, बल्कि सुरक्षा, आराम और वाहन की परफॉर्मेंस को भी महत्व दे रहे हैं। इससे प्रीमियम टायरों की मांग बढ़ रही है।
अब Continental पूरी तरह पैसेंजर व्हीकल टायर बाजार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी फिलहाल वाहन कंपनियों (OEM) को सीधे टायर सप्लाई करने की योजना नहीं बना रही है, लेकिन भविष्य में इस संभावना का मूल्यांकन जारी रहेगा।
Continental के भारत में 200 से ज्यादा ब्रांडेड रिटेल आउटलेट हैं। कंपनी इनकी संख्या बढ़ाने के साथ ऐसे पार्टनर नेटवर्क पर जोर दे रही है जो प्रीमियम उत्पादों की सही जानकारी ग्राहकों तक पहुंचा सकें। Continental के मोदीपुरम प्लांट ने कोयले की जगह बायोमास आधारित ऊर्जा का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इसके अलावा प्लांट में सोलर पावर का भी उपयोग किया जा रहा है। कंपनी रिसाइकल्ड सामग्री के इस्तेमाल और उत्पादन प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन घटाने पर भी काम कर रही है।