नई दिल्ली : विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत ने स्वच्छ और सस्ते ईंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। देश की राजधानी दिल्ली में पहला E85 फ्यूल स्टेशन शुरू कर दिया गया है। इस नए ईंधन की कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर रखी गई है, जो मौजूदा E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता है। फिलहाल दिल्ली में E20 पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है।
इस फ्यूल स्टेशन का उद्घाटन केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने किया। सरकार का लक्ष्य आने वाले महीनों में देशभर में 50 से 100 E85 स्टेशन शुरू करना है। इसके बाद 2026 के अंत तक 500 और 2027 के अंत तक लगभग 5,000 E85 फ्यूल स्टेशन स्थापित करने की योजना है। E85 एक विशेष ईंधन है जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। यह मौजूदा E20 फ्यूल से काफी अलग है, क्योंकि E20 में केवल 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार का मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और देश के गन्ना व बायोफ्यूल उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
पहली नजर में E85 का कम दाम काफी आकर्षक लगता है, लेकिन इसके साथ एक महत्वपूर्ण बात भी जुड़ी है। एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा कम होती है। यही कारण है कि E85 पर चलने वाले वाहन समान दूरी तय करने के लिए ज्यादा ईंधन की खपत कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार E85 इस्तेमाल करने पर माइलेज में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। फ्यूल सस्ता जरूर होगा, लेकिन खपत बढ़ने से वास्तविक बचत वाहन की परफॉर्मेंस और माइलेज पर निर्भर करेगी।
सरकार तेजी से E85 स्टेशन तैयार कर रही है, लेकिन फिलहाल भारत में E85 पर चलने वाले वाहन बेहद कम हैं। हाल ही में Hero MotoCorp ने Splendor Plus और HF Deluxe के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन पेश किए हैं, जिनकी डिलीवरी जुलाई 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। E85 फ्यूल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वाहन निर्माता कितनी तेजी से फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च करते हैं, देशभर में फ्यूल स्टेशन कितनी जल्दी बढ़ते हैं और ग्राहक इस नई तकनीक को कितना अपनाते हैं। फिलहाल E85 भारत के लिए एक महत्वाकांक्षी और भविष्य-केंद्रित पहल है। अगर आने वाले वर्षों में पर्याप्त वाहन और मजबूत फ्यूल नेटवर्क तैयार हो जाता है, तो यह तकनीक देश में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
