भारत डेटा सेंटर का बिग मार्केट बनने की दहलीज़ पर, 90 अरब डॉलर के निवेश की तैयारी

भारत डेटा सेंटर का बिग मार्केट बनने की दहलीज़ पर, 90 अरब डॉलर के निवेश की तैयारी

• AI, इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं के लिए तैयार हो रहा नया इंफ्रास्ट्रक्चर

भारत में डेटा की खपत तेजी से बढ़ रही है। AI, 5G, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के कारण देश में डेटा सेंटर उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत की मौजूदा डेटा सेंटर क्षमता करीब 1.5 गीगावाट (GW) है, जो 2030 तक बढ़कर 6.5 GW होने का अनुमान है। अगले पांच वर्षों में इसमें चार गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। भारत आज दुनिया में सबसे ज्यादा डेटा बनाने वाले देशों में शामिल है।
देश में दुनिया का करीब 20 प्रतिशत डेटा तैयार होता है, लेकिन ग्लोबल डेटा सेंटर क्षमता में भारत की हिस्सेदारी अभी केवल 3-4 प्रतिशत है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में विकास की काफी संभावनाएं देखी जा रही हैं। 2025 में भारत ने 387 मेगावाट (MW) नई डेटा सेंटर क्षमता जोड़ी, जो 2024 में जोड़ी गई 191 MW क्षमता से दोगुनी से ज्यादा है। एक साल में क्षमता बढ़ने की रफ्तार 103 प्रतिशत रही।
डेटा सेंटर की संख्या के मामले में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। जून 2025 तक भारत दुनिया में सातवें स्थान पर पहुंच चुका था। देश में डेटा सेंटर का सबसे ज्यादा विस्तार कुछ प्रमुख शहरों में हुआ है। मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली-NCR, बेंगलुरु और चेन्नई मिलकर देश के कुल डेटा सेंटर का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं। इन शहरों में बड़ी टेक कंपनियां, स्टार्टअप और डिजिटल सेवाओं की मौजूदगी के कारण डेटा सेंटर की मांग लगातार बढ़ रही है।
भारत का डेटा सेंटर सेक्टर आने वाले वर्षों में बड़े निवेश का गवाह बनने वाला है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 90 अरब डॉलर का निवेश पाइपलाइन में है।
बड़ी वैश्विक कंपनियां भारत में अपने क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रही हैं। इससे डेटा सेंटर, सर्वर, बिजली, रियल एस्टेट और तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे। डेटा सेंटर की बढ़ती जरूरत के पीछे कई बड़े कारण हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, 5G नेटवर्क, डिजिटल पेमेंट और सरकारी डिजिटल योजनाएं प्रमुख हैं।
आज बैंकिंग, ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बड़ी मात्रा में डेटा पर निर्भर हैं। इस डेटा को सुरक्षित रखने और तेजी से प्रोसेस करने के लिए आधुनिक डेटा सेंटर जरूरी हो गए हैं।
डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार के साथ बिजली और पानी की जरूरत भी तेजी से बढ़ेगी। डेटा सेंटर 24 घंटे चलते हैं और इन्हें लगातार बिजली सप्लाई की आवश्यकता होती है। AI, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भारत का डेटा सेंटर उद्योग रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास का बड़ा केंद्र बन सकता है।