सोलर बिजली होगी स्टोर, CO₂ उत्सर्जन होगा कम
खरखौदा प्लांट बना ग्रीन टेक्नोलॉजी का मॉडल, Maruti ने शुरू किया BESS
Maruti Suzuki India Limited ने हरियाणा के खारखौदा स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 1 MWh क्षमता वाला Battery Energy Storage System (BESS) शुरू कर दिया है। यह कदम कंपनी की ग्रीन एनर्जी रणनीति को मजबूत करने के साथ-साथ भारत में स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
पिछले वर्ष कंपनी ने इसी प्लांट में 20 मेगावाट पीक (20 MWp) का सोलर पावर प्रोजेक्ट स्थापित किया था। लेकिन फैक्ट्री बंद रहने या कम मांग वाले दिनों में सोलर प्लांट से बनने वाली अतिरिक्त बिजली का उपयोग नहीं हो पाता था। अब नया Battery Energy Storage System (BESS) इस अतिरिक्त बिजली को स्टोर करेगा और जरूरत पड़ने पर फैक्ट्री में उसका उपयोग किया जाएगा। इससे न सिर्फ ऊर्जा की बर्बादी रुकेगी बल्कि बिजली ग्रिड की स्थिरता भी बेहतर होगी।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO Hisashi Takeuchi ने कहा कि Maruti Suzuki भारत के आत्मनिर्भर और हरित ऊर्जा तंत्र के लक्ष्य के साथ पूरी तरह जुड़ी हुई है। उनके अनुसार, लगभग 15 वर्ष की जीवन अवधि वाले इस BESS की मदद से हर साल करीब 54 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आएगी। आने वाले वर्षों में कंपनी का उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन इसके बावजूद Maruti Suzuki अपने विनिर्माण संयंत्रों में Scope 1 और Scope 2 कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य पर कायम रहेगी। यह रणनीति कंपनी की मूल संस्था Suzuki Motor Corporation के पर्यावरणीय विजन के अनुरूप है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक 2022-23 के स्तर की तुलना में Scope 1 और Scope 2 CO₂ उत्सर्जन में 42% की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
खारखौदा प्लांट में शुरू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट भविष्य में Maruti Suzuki के अन्य संयंत्रों में भी ग्रीन एनर्जी और ऊर्जा भंडारण तकनीक के विस्तार की दिशा तय कर सकता है।
