Maruti Suzuki रचेगी इतिहास, 5  जून को लॉन्च होगी INDIA की पहली Flex-Fuel Car

पेट्रोल को चुनौती! Maruti Suzuki ला रही है Ethanol से चलने वाली कार

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki आज भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक नया अध्याय लिखने जा रही है। कंपनी 5 जून को भारत की पहली Flex-Fuel कार लॉन्च करने की तैयारी में है। World Environment Day पर होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri भी मौजूद रहेंगे। यह लॉन्च केवल एक नई कार की एंट्री नहीं, बल्कि वैकल्पिक ईंधन आधारित मोबिलिटी की दिशा में भारत के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

पिछले कुछ वर्षों से Nitin Gadkari लगातार Ethanol आधारित ईंधन को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। सरकार का मानना है कि पेट्रोल और डीजल पर भारत की निर्भरता कम करने के लिए Flex-Fuel Vehicles अहम भूमिका निभा सकते हैं। वर्तमान में देश अपनी जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत पेट्रोलियम ईंधन आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव पड़ता है। जीवाश्म ईंधन से होने वाला प्रदूषण भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में Ethanol आधारित ईंधन को पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

दरअसल, अप्रैल 2026 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने E100 Fuel Blend Standards को वाहन परीक्षण और प्रमाणन मानकों में शामिल किया था। इसके बाद से Flex-Fuel Vehicles के व्यावसायिक लॉन्च का रास्ता साफ हो गया। अब Maruti Suzuki इस दिशा में पहला बड़ा कदम उठाने जा रही है।

कंपनी इससे पहले Bharat Mobility Expo 2025 में Wagon R Flex Fuel और Fronx Flex Fuel Concept को प्रदर्शित कर चुकी है। माना जा रहा है कि 5 जून को लॉन्च होने वाला मॉडल इन्हीं दोनों में से एक हो सकता है। ऑटो सेक्टर के जानकारों का अनुमान है कि Wagon R Flex Fuel लॉन्च होने की संभावना अधिक है, क्योंकि इसका E100 संस्करण पहले ही सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जा चुका है। E100 का मतलब है कि वाहन 100 प्रतिशत Ethanol पर भी चल सकता है। वहीं Fronx Flex Fuel के E85 तक के Ethanol Blend को सपोर्ट करने की उम्मीद है। Flex-Fuel Vehicle की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यह पेट्रोल और Ethanol के विभिन्न मिश्रणों पर चल सकती है। इससे ईंधन लागत कम होने, प्रदूषण घटाने और किसानों को Ethanol उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।