मॉनसून की मार से ट्रैक्टर मार्केट की रफ्तार पर ब्रेक! अगस्त में बिक्री धीमी

मॉनसून की मार से ट्रैक्टर मार्केट की रफ्तार पर ब्रेक! अगस्त में बिक्री धीमी

भारतीय ट्रैक्टर उद्योग की मांग में अगस्त 2026 के दौरान कुछ नरमी देखने को मिली है। ICRA के मुताबिक, अगस्त में ट्रैक्टरों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 6.5% की बढ़ोतरी हुई, जबकि खुदरा बिक्री की वृद्धि महज 0.8% रही। करीब डेढ़ साल तक दोहरे अंक में मजबूत वृद्धि के बाद अब हाई बेस इफेक्ट का असर दिखाई देने लगा है। ICRA का अनुमान है कि 2026 में 23.5% की मजबूत थोक बिक्री वृद्धि के बाद वित्त वर्ष 2027 में ट्रैक्टर उद्योग की थोक बिक्री की वृद्धि घटकर 1-4% रह सकती है। इसके पीछे ऊंचा बेस इफेक्ट और सामान्य से कम मानसून का अनुमान प्रमुख कारण हैं।
अगस्त में खुदरा बिक्री की धीमी रफ्तार के पीछे मानसून से जुड़ी चुनौतियां और पिछले साल का ऊंचा बेस प्रमुख कारण रहे। कमजोर मानसून से कृषि उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित होने की आशंका है। इसका असर नए ट्रैक्टरों की मांग और पुराने ट्रैक्टरों को बदलने की जरूरत पर भी पड़ सकता है।
ICRA के अनुसार, 14 सितंबर 2026 तक दक्षिण-पश्चिम मानसून की संचयी बारिश सामान्य दीर्घकालिक औसत (LPA) के मुकाबले 85% रही है। बारिश में करीब 15% की कमी दर्ज की गई है। IMD के पहले चरण के लॉन्ग रेंज फोरकास्ट में 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए 90% ± 4% LPA का अनुमान लगाया गया था।
दक्षिणी प्रायद्वीप, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश की कमी देखने को मिली है। लंबे समय तक बारिश की कमी रहने पर खरीफ फसलों के उत्पादन और किसानों की आमदनी पर दबाव बढ़ सकता है। मई 2026 में जारी कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक वर्ष 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन 376.6 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो सालाना आधार पर 5.3% अधिक है। MSP और सरकारी सब्सिडी से किसानों के नकदी प्रवाह को समर्थन मिल रहा है।
हालांकि, खरीफ रकबे में संभावित कमी और सामान्य से कम मानसून के कारण FY2027 में ट्रैक्टर उद्योग की वृद्धि पर दबाव रह सकता है। ऊंचे बेस को देखते हुए ICRA ने 1-4% की थोक बिक्री वृद्धि का अनुमान जताया है।
ICRA के मुताबिक, ट्रैक्टर निर्माताओं के मार्जिन फिलहाल स्वस्थ बने रहने की उम्मीद है। बेहतर ऑपरेटिंग लीवरेज और कच्चे माल की लागत में स्थिरता से कंपनियों को फायदा मिल सकता है। कम कर्ज, पर्याप्त नकदी और स्वस्थ मुनाफे के चलते प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल भी आरामदायक रहने की उम्मीद है।