सूरत के छात्र का JALAAKAR बना चैंपियन, मशीन लर्निंग से बताएगा कहां कितना भूजल
देशभर के प्रतिभाशाली छात्रों के 705 जिलों से आए आइडियाज, टॉप-10 को मिला सम्मान
भारत के युवा इनोवेटर्स के बड़े मंच, vivo Ignite में 10 शिक्षकों को भी मिला सम्मान
भारत के स्कूली छात्रों ने साबित कर दिया है कि बड़े बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि सोच और तकनीक का सही इस्तेमाल जरूरी है। vivo India के राष्ट्रीय नवाचार कार्यक्रम vivo Ignite 2026 में देशभर के छात्रों ने पानी बचाने, सड़क सुरक्षा, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा और दिव्यांगों की मदद जैसे गंभीर मुद्दों के लिए तकनीक आधारित समाधान पेश किए। इस प्रतियोगिता में गुजरात के सूरत स्थित RMG Maheshwari English School के छात्र धेयाय शाह ने अपने प्रोजेक्ट JALAAKAR – The Shape of Water: Predict, Alert, & Act के दम पर पहला स्थान हासिल किया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 28 अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रीय फिनाले में शीर्ष 10 छात्र नवाचारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के चौथे संस्करण में 12,000 से अधिक स्कूलों से 38,000 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए और छात्रों ने 6,100 से अधिक आइडिया पेश किए। इनकी पहुंच देश के 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों के 705 जिलों तक रही, जिनमें 92 आकांक्षी जिले भी शामिल हैं। vivo Ignite के तहत विजेताओं, उपविजेताओं और अन्य प्रतिभागियों के लिए स्कॉलरशिप और पुरस्कारों का कुल प्रावधान 35 लाख रुपये तक है। कंपनी ने इसके साथ STEM शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और रोचक बनाने वाले 10 शिक्षकों को भी सम्मानित किया।
पहले स्थान पर रहे JALAAKAR प्रोजेक्ट में बोरवेल के पुराने रिकॉर्ड, बारिश और मिट्टी से जुड़े आंकड़ों के साथ मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। दूसरे स्थान पर मुंबई के धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल के विद्युत सुंदर और श्रेयान लिमये का JalRakshak प्रोजेक्ट रहा।
तीसरे स्थान पर चेन्नई के पद्मा शेषाद्रि बाला भवन सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों का HydroPlastiNet प्रोजेक्ट रहा। प्रतियोगिता के चौथे स्थान पर रहा Project Unmuted – The Voice of Women, जिसे महाराष्ट्र के SNBP International School की अनुष्का भट्टाचार्य ने विकसित किया। पांचवें स्थान पर नागपुर के छात्र आयुष्मान चौधरी का Project IRIS रहा। छठे स्थान पर उत्तर प्रदेश के बरेली कैंट स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल के शौर्य दुबे का AVRODH प्रोजेक्ट रहा। इसका उद्देश्य गैस सेंसर, RFID और सुरक्षा जांच के जरिए खतरनाक जगहों पर अनधिकृत या असुरक्षित प्रवेश रोकने में मदद करना है।
सातवें स्थान पर वाहन दुर्घटना के समय मदद पहुंचाने वाला स्मार्ट डिवाइस रहा, जिसे उत्तर प्रदेश के अभिषेक श्रीवास्तव ने विकसित किया। आठवें स्थान पर महाराष्ट्र के जितेश लड्डा का DrishtiBodh प्रोजेक्ट रहा। इसमें LiDAR सेंसर और कंपन के संकेतों के जरिए दृष्टिबाधित लोगों को आसपास की बाधाओं के बारे में सचेत करने की योजना है।
नौवें स्थान पर कानपुर के साई अध्रित सिंह का AquaSentinel AI रहा, जो पानी में फ्लोराइड की मात्रा का अनुमान लगाने के लिए रंग आधारित रासायनिक परीक्षण, लाइट सेंसर और ऑफलाइन मशीन लर्निंग मॉडल का इस्तेमाल करता है। दसवें स्थान पर इंदौर के अद्विक जैन का Neuradrive: Movement for All प्रोजेक्ट रहा।
vivo India ने National Teacher Innovation Fellowship के तहत 10 शिक्षकों को सम्मानित किया। इस फेलोशिप के लिए 14 राज्यों और 26 जिलों से 200 से अधिक आवेदन मिले थे। इस संस्करण को IITM Pravartak Technologies Foundation, Science Olympiad Foundation और UN Global Compact Network India का सहयोग मिला, जबकि Grant Thornton ने प्रक्रिया सत्यापन की जिम्मेदारी निभाई।
