20,000 करोड़ से ज्यादा FII बिकवाली, बाजार में चारों तरफ लाल निशान
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ी तो भारतीय बाजार हिला, Sensex में भारी गिरावट
रुपया गिरकर 96 रुपये प्रति डॉलर के पार, कच्चा तेल करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
महंगे तेल, कमजोर रुपये, बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी पूंजी की निकासी ने दलाल स्ट्रीट पर बरपाया कहर
भारतीय शेयर बाजार में 1 अक्टूबर को ऐसी बिकवाली मची कि निवेशकों के बीच हड़कंप मच गया। Sensex 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया और Nifty 22,300 के नीचे फिसल गया। देखते ही देखते BSE पर लिस्टेड कंपनियों की करीब ₹9 लाख करोड़ की बाजार पूंजी साफ हो गई। बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का है। 30 सितंबर को FII ने 10,000 करोड़ से ज्यादा के भारतीय शेयर बेच डाले और दो दिनों में उनकी बिकवाली ₹20,000 करोड़ के पार पहुंच गई। दूसरी तरफ अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.3% के ऊपर पहुंचने से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी निवेश आकर्षक हुआ है। रुपया ₹96 प्रति डॉलर के पार कमजोर हो गया और मध्य-पूर्व के तनाव के बीच कच्चा तेल करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। महंगा तेल, कमजोर रुपया, बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी पूंजी की निकासी—इन चारों के दबाव ने मिलकर दलाल स्ट्रीट पर ऐसा कहर बरपाया कि कुछ ही घंटों में बाजार की तस्वीर बदल गई।
बाजार में सबसे बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों की बिकवाली से आया। 30 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार से ₹10,000 करोड़ से ज्यादा की रकम निकाल ली। इससे पिछले दो कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली ₹20,000 करोड़ से ज्यादा हो गई।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को ऐसी जोरदार बिकवाली मची कि कुछ ही घंटों में निवेशकों की करीब ₹9 लाख करोड़ की दौलत साफ हो गई। Sensex देखते ही देखते 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty भी 22,300 के नीचे फिसल गया। बाजार पर विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया
बाजार की गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका की 10 साल की Treasury yield का 5.3% के ऊपर पहुंचना भी शामिल है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है, तो वैश्विक निवेशकों के लिए डॉलर आधारित सुरक्षित निवेश ज्यादा आकर्षक हो सकता है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकलने का दबाव बढ़ सकता है। बढ़ती बॉन्ड यील्ड का असर भारत जैसे बाजारों पर इसलिए भी पड़ता है क्योंकि निवेशक जोखिम और संभावित रिटर्न के बीच नए सिरे से संतुलन बनाने लगते हैं।
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी दबाव में रहा और ₹96 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। महंगा डॉलर भारतीय बाजार के लिए एक और चुनौती है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारत में किए गए निवेश के डॉलर मूल्य वाले रिटर्न को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, भारत के लिए कच्चे तेल का महंगा होना भी चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। Brent crude करीब 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।महंगा तेल भारत के लिए कई स्तरों पर दबाव बढ़ा सकता है। शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी है। अगर ये दबाव बने रहते हैं तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं, वैश्विक मोर्चे पर तनाव कम होने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमने से बाजार की धारणा में सुधार की गुंजाइश बन सकती है।
