टाटा की टेक्नोलॉजी और Jeep की ताकत का संगम! भारत में बनेंगी 50+ देशों के लिए गाड़ियां

टाटा की टेक्नोलॉजी और Jeep की ताकत का संगम! भारत में बनेंगी 50+ देशों के लिए गाड़ियां

• टाटा मोटर्स और Stellantis की बड़ी डील, भारत बनेगा ग्लोबल कार हब

• टाटा मोटर्स की इंजीनियरिंग को मिलेगा ग्लोबल प्लेटफॉर्म, Stellantis के साथ बढ़ी साझेदारी

• Nexon से Jeep तक की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, अब भारत से बढ़ेगा ग्लोबल ऑटो कारोबार

• पुणे के रंजनगांव प्लांट से ग्लोबल बाजारों तक, टाटा-Stellantis की साझेदारी का बढ़ा दायरा

• मेक इन इंडिया को नई रफ्तार! टाटा मोटर्स और Stellantis मिलकर बढ़ाएंगे कारों का ग्लोबल कारोबार

भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर को ग्लोबल स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और Stellantis ने अपनी दो दशक से ज्यादा पुरानी साझेदारी का दायरा बढ़ा दिया है। दोनों कंपनियों ने एडवांस्ड व्हीकल टेक्नोलॉजी, कार प्लेटफॉर्म और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में सहयोग के लिए एक निर्णायक समझौते (Definitive Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत भारत में विकसित और निर्मित गाड़ियों को 50 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने की योजना है।
12 अक्टूबर 2026 को घोषित यह समझौता फरवरी 2026 में हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को आगे बढ़ाता है। इससे भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क का इस्तेमाल वैश्विक बाजारों के लिए वाहन विकसित करने में किया जाएगा।
समझौते के तहत टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड (TMPV) और उसकी सहायक कंपनी टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड (TPEM) अपनी एडवांस्ड प्रोडक्ट टेक्नोलॉजी और व्हीकल आर्किटेक्चर तक Stellantis की पहुंच उपलब्ध कराएंगी।
समझौते के तहत विकसित होने वाली गाड़ियों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इसके लिए Fiat India Automobiles Private Limited (FIAPL) की मैन्युफैक्चरिंग सुविधा का इस्तेमाल होगा। FIAPL, टाटा मोटर्स और Stellantis का 50:50 संयुक्त उद्यम है।
इस साझेदारी का उद्देश्य केवल भारतीय बाजार के लिए वाहन बनाना नहीं है। कंपनियां भारत की प्रतिस्पर्धी इंजीनियरिंग लागत, तकनीकी विशेषज्ञता और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता का इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती हैं। 50 अलग-अलग देशों के लिए वाहनों को उनकी नियामकीय जरूरतों, ग्राहकों की अपेक्षाओं और सड़क पर इस्तेमाल की परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इससे भारत में तैयार उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
टाटा मोटर्स और Stellantis के बीच पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग सहयोग रहा है। नया समझौता इस रिश्ते को उत्पादन से आगे बढ़ाकर वाहन तकनीक, आर्किटेक्चर और प्रोडक्ट डेवलपमेंट तक ले जाता है।
पुणे के पास रंजनगांव स्थित FIAPL का एकीकृत वाहन और पावरट्रेन प्लांट इस सहयोग में अहम भूमिका निभा सकता है। यहां Jeep Compass, Meridian, Grand Cherokee और Wrangler जैसे Stellantis मॉडल के साथ Tata Nexon, Altroz और Curvv का भी निर्माण होता है।
टाटा के वाहन प्लेटफॉर्म और तकनीकी क्षमताओं का व्यापक इस्तेमाल हो सकेगा। Stellantis की अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग विशेषज्ञता से अलग-अलग बाजारों के लिए वाहन विकसित किए जा सकेंगे। समझौते के तहत तैयार वाहनों का उत्पादन देश में होगा। 50 से ज्यादा बाजारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर भारत को वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में मजबूत स्थान दिलाने की कोशिश होगी।