अब नहीं जलेगी पराली, MAHINDRA की MaxSeeder मशीन से धान के अवशेषों के बीच कई फसलों की बुआई

अब नहीं जलेगी पराली, MAHINDRA की MaxSeeder मशीन से धान के अवशेषों के बीच कई फसलों की बुआई

MaxSeeder को 35 HP या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चलाया जा सकता है

MAHINDRA की जीरो-टिल सीडिंग मशीन में 35 HP ट्रैक्टर, मोबाइल ऐप और सटीक खाद मिलेगी

मोबाइल से कंट्रोल होगी खाद और बीज की डोज, महिंद्रा की नई मशीन में हाईटेक सिस्टम

पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने और खेती की लागत घटाने की दिशा में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपनी नई MaxSeeder जीरो-टिल मल्टी-क्रॉप सीडिंग मशीन का व्यावसायिक उत्पादन और सप्लाई शुरू कर दी है। कनाडा की Clean Seed Technologies से लाइसेंस लेकर तैयार की गई यह मशीन धान की पराली के बीच खेत की जुताई किए बिना सीधे बुवाई करने के लिए डिजाइन की गई है।

इस तकनीक से किसानों को खेत तैयार करने के कई पारंपरिक कामों से राहत मिल सकती है। मशीन से धान की पराली के बीच गेहूं समेत कई फसलों की बुवाई की जा सकेगी। इससे पराली जलाने की जरूरत कम करने, ईंधन बचाने और खाद व बीज की बर्बादी घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

MaxSeeder की बड़ी खासियत यह है कि इसे 35 हॉर्सपावर (HP) या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चलाया जा सकता है। इसके लिए ज्यादा ताकतवर और महंगे ट्रैक्टर की जरूरत नहीं होगी। इससे छोटे और मध्यम किसानों के लिए आधुनिक बुवाई तकनीक अपनाना आसान हो सकता है। यह ट्रैक्टर के पीछे लगाकर चलाई जाने वाली मशीन है। इसे मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित महिंद्रा के विशेष फार्म मशीनरी प्लांट में बनाया जा रहा है। इसकी सप्लाई चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी और शुरुआती दौर में पंजाब तथा हरियाणा के किसानों तक इसे पहुंचाया जाएगा।

MaxSeeder की जीरो-टिल तकनीक खेत की मिट्टी को कम से कम छेड़ते हुए पराली के बीच सीधे बीज बोने में मदद करती है।

MaxSeeder को अलग-अलग फसलों की जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे धान, गेहूं, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी फसलों की बुवाई की जा सकती है। मशीन में पांच स्वतंत्र सीडिंग रो यूनिट दी गई हैं।

इस मशीन में इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) दी गई है, जो खेत की जरूरत के मुताबिक बीज, DAP और यूरिया की मात्रा नियंत्रित करने में मदद करती है। इसे ऑपरेटर के मोबाइल फोन पर ऐप के जरिए भी नियंत्रित किया जा सकता है। यह यूरिया को बीज की लाइन से लगभग 1.5 इंच नीचे पहुंचाती है।

महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के अध्यक्ष विजय नकरा ने कहा कि Clean Seed Technologies के साथ साझेदारी का उद्देश्य किसानों तक टिकाऊ और आधुनिक मशीनीकरण समाधान पहुंचाना है। उनके मुताबिक, महिंद्रा की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और Clean Seed की प्रिसिजन सीडिंग तकनीक मिलकर खेती को अधिक कुशल बनाने में मदद कर सकती हैं।