Kotak Prime का दावा, पहली कार के लिए आठ लाख रुपये तक खर्च कर रहे GEN-Z

Kotak Prime का दावा, पहली कार के लिए आठ लाख रुपये तक खर्च कर रहे GEN-Z

• बदला इंडिया में कार खरीदने का ट्रेंड, कॉम्पैक्ट SUV की ओर बढ़े युवा

• युवाओं की पहली कार अब सिर्फ सफर का साधन नहीं, स्टाइल और स्टेटस की पहचान

• अब युवा देखते हैं रीसेल वैल्यू, सेफ्टी और EMI का हिसाब, पहली गाड़ी में ज्यादा स्पेस, टेक्नोलॉजी और आराम चाहते हैं युवा

नई दिल्ली: भारत में पहली कार खरीदने का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। कभी कम कीमत और बेहतर माइलेज को सबसे ज्यादा तवज्जो देने वाले युवा अब अपनी पहली गाड़ी में सेफ्टी, आधुनिक फीचर्स, आराम और दमदार रोड प्रेजेंस भी चाहते हैं। यही वजह है कि पहली कार खरीदने का बजट 1.5-2.5 लाख रुपये से बढ़कर अब 5-8 लाख रुपये तक पहुंच गया है। कई युवा इससे ज्यादा खर्च करके बेहतर वेरिएंट, कॉम्पैक्ट SUV और मिड-सेगमेंट कारें भी चुन रहे हैं। Kotak Mahindra Prime के मुताबिक, नई पीढ़ी के ग्राहक अपनी पहली कार पर पिछली पीढ़ी के मुकाबले करीब दोगुना निवेश कर रहे हैं।

पहले ज्यादातर ग्राहकों के लिए पहली कार का मतलब किफायती कीमत में निजी वाहन खरीदना होता था। लेकिन अब युवा कार को सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों और लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा मानते हैं। ऑफिस जाने, परिवार के साथ घूमने, लंबी यात्रा करने और रोजमर्रा के कामों के लिए वे ऐसी कार चाहते हैं, जो हर परिस्थिति में उपयोगी साबित हो।

Kotak Mahindra Prime के अनुसार, करीब एक दशक पहले पहली कार खरीदने वाले ग्राहक आमतौर पर 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये के एंट्री-लेवल बजट में गाड़ी तलाशते थे। अब युवा खरीदारों का शुरुआती बजट 5 लाख से 8 लाख रुपये तक पहुंच गया है। कई ग्राहक बेहतर फीचर्स और ऊंचे सेगमेंट के लिए इससे ज्यादा रकम खर्च करने को भी तैयार हैं। महंगी कारों की तरफ बढ़ते रुझान में ऑटो लोन की अहम भूमिका है। लंबी अवधि के लोन और अपेक्षाकृत कम मासिक किस्तों की मदद से युवा अपने बजट से थोड़ा ऊपर जाकर भी बेहतर कार खरीदने पर विचार कर रहे हैं।

Kotak Prime के मुताबिक, पहली कार के लिए पांच से सात साल तक की लोन अवधि को लेकर ग्राहकों की सहजता बढ़ी है। अब कई खरीदार कार की कुल कीमत के साथ यह भी देखते हैं कि हर महीने कितनी EMI चुकानी होगी।

पहली कार खरीदने वाले युवाओं के लिए केवल नई गाड़ियां ही विकल्प नहीं रह गई हैं। सर्टिफाइड प्री-ओन्ड कारों का बाजार भी उनकी पसंद को प्रभावित कर रहा है। कई मामलों में एंट्री-लेवल नई कार के बजट में बेहतर फीचर्स वाली पुरानी SUV या मिड-साइज कार मिल सकती है।