2030 तक 8 नए EV मॉडल लॉन्च करेगी Mahindra, प्रॉडक्शन होगा डबल

2030 तक 8 नए EV मॉडल लॉन्च करेगी Mahindra, प्रॉडक्शन होगा डबल

• इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स में महिंद्रा की बड़ी छलांग! कार्गो EV और इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर्स पर फोकस

• 10,822 करोड़ की कंपनी का अगला मिशन! अब कार्गो और फोर-व्हीलर पर नजर

उत्पादन क्षमता 4 लाख वाहन सालाना करने की तैयारी, 322 करोड़ की फंडिंग से मजबूत होगी EV टेक्नोलॉजी! रेंज, एफिशिएंसी और विश्वसनीयता पर महिंद्रा का जोर

अगले 18–24 महीनों में IPO की प्रक्रिया शुरू करने की उम्मीद

इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों के बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए Mahindra Last Mile Mobility ने विस्तार की बड़ी रणनीति तैयार की है। कंपनी अब पैसेंजर इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के साथ कार्गो इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर सेगमेंट में भी तेजी से आगे बढ़ना चाहती है। वित्त वर्ष 2030 तक अपने पोर्टफोलियो में आठ नए प्रोडक्ट और वेरिएंट शामिल करने की योजना है। कंपनी का लक्ष्य बढ़ती मांग के अनुरूप उत्पादन क्षमता बढ़ाना और किफायती इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाना है।

कंपनी हाल ही में 10,822 करोड़ रुपये के वैल्यूएशन के साथ यूनिकॉर्न बनी है। मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुमन मिश्रा के मुताबिक, कार्गो इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और फोर-व्हीलर सेगमेंट में इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच बढ़ाने की काफी गुंजाइश है।

Mahindra Last Mile Mobility का मानना है कि इलेक्ट्रिक पैसेंजर थ्री-व्हीलर सेगमेंट में विस्तार के बाद अब दूसरे कमर्शियल वाहन वर्गों में भी संभावनाएं तलाशने का समय है। कंपनी के मुताबिक, कार्गो थ्री-व्हीलर में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी अभी 20 प्रतिशत से कम है, जबकि फोर-व्हीलर श्रेणी में चालू वर्ष के दौरान यह करीब 11 प्रतिशत रही है। सामान की डिलीवरी, छोटे कारोबार और शहरी लॉजिस्टिक्स में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने से कार्गो सेगमेंट अहम हो सकता है।

कंपनी ने हाल ही में वैश्विक सस्टेनेबल निवेश मंच Lightrock और मौजूदा निवेशकों से 322 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस रकम का बड़ा हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D पर खर्च करने की योजना है।

कंपनी का जोर बैटरी और पावरट्रेन की दक्षता सुधारने, बेहतर रेंज देने और वाहनों की विश्वसनीयता बढ़ाने पर रहेगा।

Mahindra Last Mile Mobility के पास फिलहाल तीन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में करीब दो लाख वाहनों की उत्पादन क्षमता है। कंपनी के मुताबिक, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इसे व्यावहारिक रूप से दोगुना करने की जरूरत है। कंपनी के अनुसार, क्षमता विस्तार में कम से कम 18 महीने लग सकते हैं। सितंबर में क्षमता की सीमाओं के बावजूद कंपनी ने अपने विभिन्न वाहन वर्गों में 18,000 से अधिक वाहनों का उत्पादन किया।

कंपनी नेपाल और श्रीलंका में इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात करती है। आगे दक्षिण-पूर्व एशिया और उसके बाद अफ्रीका के बाजारों में विस्तार की योजना है इसके साथ ही कंपनी संभावित IPO की तैयारी भी कर रही है। अगले 18–24 महीनों में इसकी प्रक्रिया शुरू करने की उम्मीद है।