24 घंटे गुलामी से कहीं स्मार्टफोन बने हीरो, दिमाग न बन जाए जीरो?

24 घंटे गुलामी से कहीं स्मार्टफोन बने हीरो, दिमाग न बन जाए जीरो?

• स्मार्टफोन की लत पर वैज्ञानिकों की नजर, कहा-मोबाइल दुश्मन नहीं, पर जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कहीं बन न जाए आफत

• फोन की घंटी बजते ही उड़ जाता है ध्यान! रील्स का चक्कर, याददाश्त पर खतरे का सिग्नल!

• नोटिफिकेशन की घंटी से भटकता ध्यान, स्मार्टफोन की लत पर वैज्ञानिकों की नजर

• डिजिटल दुनिया में खोते ध्यान से क्या कमजोर हो रही है हमारी एकाग्रता?

2007 में स्टीव जॉब्स ने पहला iPhone पेश किया था। इसके बाद स्मार्टफोन ने संचार, मनोरंजन और कामकाज की दुनिया बदल दी। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि मोबाइल पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता हमारे दिमाग और एकाग्रता को किस तरह प्रभावित कर सकती है। वैज्ञानिक शोध में अत्यधिक स्मार्टफोन इस्तेमाल और दिमाग की संरचना के बीच संबंध के संकेत मिले हैं। हालांकि, यह साबित नहीं हुआ है कि मोबाइल चलाने से सीधे दिमाग सिकुड़ता है। शोध में स्मार्टफोन के अत्यधिक इस्तेमाल, ध्यान भटकने और दिमाग के कुछ हिस्सों में ग्रे मैटर की मात्रा के बीच संबंध के संकेत मिले हैं।

ग्रे मैटर दिमाग के उन ऊतकों का हिस्सा है, जिनमें तंत्रिका कोशिकाओं के शरीर मौजूद होते हैं। ये सूचना को समझने, याद रखने और निर्णय लेने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं। कुछ अध्ययनों में समस्याग्रस्त स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले लोगों के दिमाग के कुछ क्षेत्रों में ग्रे मैटर की मात्रा कम होने का संबंध सामने आया है।

शोध में एंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स (ACC) और ऑर्बिटोफ्रंटल कॉर्टेक्स (OFC) जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। ये आत्म-नियंत्रण, निर्णय लेने और आदतों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। इंसुला और पैराहिप्पोकैम्पल क्षेत्रों का संबंध भावनाओं, आत्म-जागरूकता और याददाश्त से है। हालांकि इन क्षेत्रों में संरचनात्मक अंतर दिखने का अर्थ यह नहीं है कि ज्यादा फोन इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति की याददाश्त या आत्म-नियंत्रण कमजोर हो जाएगा।

PLOS ONE में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने स्मार्टफोन नोटिफिकेशन जैसी आवाजों के संज्ञानात्मक नियंत्रण और ध्यान पर असर की जांच की। इसमें प्रतिभागियों ने नियंत्रण वाली आवाजों की तुलना में स्मार्टफोन नोटिफिकेशन की आवाज सुनने पर कुछ कार्यों में धीमी प्रतिक्रिया दी। फोन इस्तेमाल न करते हुए भी उसकी घंटी या नोटिफिकेशन ध्यान को प्रभावित कर सकता है। लगातार संदेश देखना, सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और एक साथ कई काम करना एकाग्रता बनाए रखना मुश्किल बना सकते हैं।

विशेषज्ञों के लिए अब यह समझना महत्वपूर्ण है कि स्मार्टफोन के इस्तेमाल का समय, इस्तेमाल का तरीका, नींद, व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं। उपयोगकर्ता भी कुछ सरल कदम उठा सकते हैं। गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद करें, काम या पढ़ाई के समय फोन को नजरों से दूर रखें, सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल घटाएं और नियमित अंतराल पर बिना फोन के समय बिताएं।

स्मार्टफोन अपने आप में दुश्मन नहीं है। समस्या तब पैदा हो सकती है, जब उसका इस्तेमाल आदत पर नियंत्रण से बाहर हो जाए और नींद, काम, पढ़ाई या वास्तविक सामाजिक संपर्क प्रभावित होने लगें।